Nitin Gadkari
Nitin Gadkari जिस एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को देश की बड़ी उपलब्धि बताकर बढ़ावा दे रहे थे, अब उसी पर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की टिप्पणियों के बाद Nitin Gadkari की एथेनॉल नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का मानना है कि Nitin Gadkari द्वारा समर्थित नीतियों के कारण देश के आम नागरिकों और मध्यम वर्ग को अपनी जेब से कीमत चुकानी पड़ रही है।
पुराने वाहनों के इंजनों पर पड़ रहा बुरा असर
Nitin Gadkari की देखरेख में लागू E20 पेट्रोल नीति का सीधा असर देश की सड़कों पर चल रही करीब 8 करोड़ पुरानी मोटरसाइकिलों और स्कूटरों पर पड़ रहा है। पुरानी तकनीक और कार्बोरेटर पर आधारित इन वाहनों में E20 ईंधन के इस्तेमाल से इंजन अत्यधिक गर्म हो रहे हैं। इसके अलावा वाहनों के अंदर लगे रबर पाइप और संवेदनशील पार्ट्स गलने लगे हैं, जिससे आम जनता के लिए वाहनों का रखरखाव महंगा साबित हो रहा है।
पेट्रोल पंपों पर E10 ईंधन उपलब्ध कराने की सलाह
स्थितियों की गंभीरता को देखते हुए यह मांग उठी है कि जब तक पुरानी गाड़ियों में आवश्यक बदलाव नहीं हो जाते, तब तक पंपों पर E10 पेट्रोल की बिक्री जारी रहनी चाहिए। Nitin Gadkari जिस तेजी से E20 नीति को आगे बढ़ा रहे हैं, उसके मुकाबले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी माना जा रहा है। लॉजिस्टिक्स का हवाला देकर पुराने ईंधन की आपूर्ति न करना आम वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
खाद्य सुरक्षा और पशुचारे की बढ़ती लागत
Nitin Gadkari द्वारा प्रोत्साहित एथेनॉल उत्पादन के कारण मक्का, चावल और गन्ने जैसी फसलों की खपत फैक्ट्रियों में बढ़ गई है। इसका सीधा असर पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के चारे की उपलब्धता पर पड़ रहा है। चारे के दाम बढ़ने से आने वाले समय में अंडा, चिकन और दूध जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं के महंगे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर आम household बजट पर पड़ेगा।
पूर्ववर्ती और वर्तमान नीतियों की तुलना
नीतियां बनाने की प्रक्रिया को लेकर अब पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार और वर्तमान Nitin Gadkari के कार्यकाल के फैसलों की तुलना की जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय 5 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दी गई थी, जिसे एक संतुलित और विचार-विमर्श के बाद लिया गया कदम माना जाता था। आलोचकों का कहना है कि Nitin Gadkari के नेतृत्व में लिए गए फैसले जल्दबाजी में रिकॉर्ड बनाने के लिए गए हैं, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
नीतिगत फैसलों का आम जनता पर पड़ता प्रभाव
Nitin Gadkari की नीतियों के व्यावहारिक परिणामों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि Nitin Gadkari के फैसलों से उद्योगपतियों को लाभ हो रहा है, जबकि पुरानी गाड़ियां कबाड़ में बदलने के कगार पर पहुंच गई हैं। Nitin Gadkari को अब यह स्पष्ट करना होगा कि बिना पूरी तैयारी के लागू की गई इस नीति का आर्थिक बोझ आखिरकार देश का गरीब और मध्यम वर्ग कब तक उठाता रहेगा।
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