CM Yogi
CM Yogi की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार पर विधानसभा चुनाव करीब आते ही एक बार फिर नफरत और धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रदेश में जैसे-जैसे चुनावी माहौल गरमा रहा है, मंदिर-मस्जिद और हिंदू-मुसलमान का पुराना खेल खुलेआम शुरू हो चुका है। आलोचकों का कहना है कि रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य और विकास के मोर्चे पर पिछले 10 सालों में पूरी तरह विफल रहने के बाद अब जनता के सवालों का जवाब CM Yogi सरकार के पास नहीं है। यही वजह है कि वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने और नाकामियों को छिपाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी के जरिए धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुरादाबाद में मुस्तफा मस्जिद को अचानक थमाया गया नोटिस
इसी कड़ी में ताजा मामला मुरादाबाद के पाकबड़ा थाना इलाके से सामने आया है, जहां दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे-9 के किनारे बनी करीब तीन दशक पुरानी मुस्तफा मस्जिद पर बुलडोजर चलाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने लगभग तीन सौ वर्गमीटर में बनी इस मस्जिद को अचानक अवैध निर्माण बताकर नोटिस जारी कर दिया है।
जिस मस्जिद में पिछले तीस सालों से नियमित नमाज अदा की जा रही है, उसे अचानक गैर-कानूनी घोषित करने की यह जल्दबाजी प्रशासनिक मंशा पर सवाल खड़े करती है। नोटिस की मियाद खत्म होते ही कार्रवाई का डर पैदा कर इलाके में तनाव का माहौल बनाया जा रहा है, जिसे CM Yogi का प्रशासनिक तंत्र भले ही अनदेखा करे, लेकिन जनता समझ रही है।
सहारनपुर में सौ साल पुरानी मस्जिद पर तड़के चला बुलडोजर
धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे कुछ ही दिन पहले सहारनपुर में भी ऐसा ही प्रशासनिक रवैया देखने को मिला था। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित सौ साल से भी ज्यादा पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को रातों-रात बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। अंग्रेजों के जमाने की इस मस्जिद के सबूत के तौर पर 1911 का बिजली बिल और अन्य कागजात पेश किए जाने के बावजूद CM Yogi के प्रशासन ने किसी की बात नहीं सुनी। 5 सितंबर की तड़के पांच बजे, जब शहर सो रहा था, तब चुपके से बुलडोजर चलाकर मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया।
आवाज उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी
इस अन्याय और तानाशाही के खिलाफ जब सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर हुदा जरीवाला ने आवाज उठाई और प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगने सर्किट हाउस पहुंचीं, तो उन्हें अपनी बात रखने का मौका तक नहीं दिया गया। इसके बजाय, पुलिस बल का प्रयोग करते हुए उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना से यह साफ संदेश देने की कोशिश की गई है कि CM Yogi के शासनकाल में अगर कोई सरकार से सवाल पूछेगा या नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठाएगा, तो उसे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
अप्रैल 2025 तक ढाई सौ से अधिक मस्जिदों-मदरसों पर कार्रवाई
सरकारी आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, अकेले अप्रैल 2025 तक ही CM Yogi के प्रशासन ने पूरे प्रदेश में ढाई सौ से भी ज्यादा मस्जिदों और मदरसों को अवैध बताकर सील कर दिया या बुलडोजर से ढहा दिया। इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई पर केंद्र की मोदी सरकार की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। विपक्ष का आरोप है कि यह पूरा एजेंडा केंद्र के इशारे पर ही चलाया जा रहा है, क्योंकि विकास और रोजगार के मोर्चे पर विफल होने के बाद अब केवल धार्मिक विभाजन ही राजनीतिक सहारा बचा है। इस नीति के तहत CM Yogi की सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है।
आगामी चुनाव में जनता देगी माकूल जवाब
प्रदेश की राजनीति में नफरत और विभाजन के इस खेल को अब उत्तर प्रदेश की जागरूक जनता पूरी तरह से समझ चुकी है। विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर घिरी CM Yogi सरकार को आगामी विधानसभा चुनाव में जनता के कड़े सवालों का सामना करना पड़ेगा। लोगों का मानना है कि नफरत की इस राजनीति का अंत जल्द होगा और उत्तर प्रदेश की जनता अगले साल होने वाले चुनावों में अपने वोट के जरिए CM Yogi और उनकी सरकार को इसका माकूल जवाब देगी।
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