PM Modi

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Public went against PM Modi’s Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुमलों से अब देश की जनता ऊब चुकी है। अब वो इनके झांसे में नहीं आती है। अब वो इनकी बातों पर यकीन नहीं कर रही है। इसका सबसे ताजा उदाहरण देखने को मिला है सोना बाजार में। याद होगा आपको, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने कुछ दिन पहले देश की जनता से अपील की थी कि एक साल तक सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो। उन्होंने कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए हमें त्याग करना चाहिए। लेकिन हुआ ठीक उल्टा।

जनता ने नहीं सुनी PM Modi की बात

मोदी जी की अपील के बाद पूरे देश में सोना खरीदने की होड़ मच गई। लोग घबराकर सोने के आभूषण खरीदने लगे। खासकर शादी के सीजन को देखते हुए ब्राइडल ज्वेलरी की बिक्री में 15 से 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हो गई। सिर्फ दो दिनों में कई शोरूम लगभग खाली हो गए। हालांकि ये कोई सामान्य खरीदारी नहीं थी। ये पैनिक बाइंग थी। लोग डर गए कि कहीं सरकार सोने पर और टैक्स न बढ़ा दे। और आखिरकार वैसा ही हुआ। 13 मई 2026 से सरकार ने सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी, जिससे सोना और महंगा हो गया।

जनता को नहीं सरकार पर भरोसा

यहां मोदी जी (PM Modi) ने जनता से त्याग मांगा, लेकिन जनता ने उनकी बात मानने की बजाय उल्टा कर दिया। ये दिखाता है कि अब लोग मोदी जी की बातों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि ये सिर्फ जुमलेबाजी है। जब प्रधानमंत्री कहते हैं “सोना मत खरीदो”, तो जनता सोचती है कि जरूर कोई बड़ी समस्या आने वाली है, इसलिए जल्दी से सोना खरीद लें। यही वजह है कि उनकी अपील का उल्टा असर पड़ा।

12 सालों में सबने देख ली है सच्चाई

लेकिन ये सिर्फ सोने का मुद्दा नहीं है। ये पूरी सरकार की विश्वसनीयता का मुद्दा है। 12 साल में जनता ने देख लिया है कि बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं होता। महंगाई बढ़ती है, रुपया गिरता है, फिर जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है। तुम बचत करो, तुम त्याग करो, हम मौज करेंगे। लेकिन अब जनता समझ चुकी है। वो समझ चुकी है सरकार की चालों को। इसलिए जब मोदी जी कहते हैं सोना मत खरीदो, तो लोग और ज्यादा सोना खरीद लेते हैं।

सरकार (PM Modi) ने सोचा था कि इस अपील से लोग सोना खरीदना बंद कर देंगे, लेकिन नतीजा उल्टा निकला। शोरूम मालिकों का कहना है कि पिछले कई दिनों में इतनी तेज बिक्री पहले कभी नहीं देखी। ये घटना साफ दिखाती है कि मोदी सरकार की बातों पर जनता का भरोसा कम हो गया है। लोग अब उनके उपदेशों को गंभीरता से नहीं लेते। वे जान गए हैं कि आर्थिक समस्याओं की जिम्मेदारी सरकार नहीं लेती, बल्कि उसे जनता पर थोप दिया जाता है।

रविवार को PM Modi ने की ये अपील

रविवार को हम सबने देखा, कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। देश इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। रुपये की कीमत लगातार गिर रही है, महंगाई बढ़ रही है। अभी आगे आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होने वाली है। लेकिन प्रधानमंत्री ने कोविड-19 की आपदा की तरह ही इस बार भी अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभाईं।

जब दुनियाभर के देश मिडल ईस्ट में चल रहे बवाल को देखते हुए तैयारियां कर रहे थे, तब महामानव चुनाव प्रचार में मस्त थे। एक राज्य से दूसरे राज्य चक्कर काट रहे थे, रैलियां कर रहे थे। तब उन्हें देश की अर्थव्यवस्था की चिंता नहीं हुई। तब उन्हें रुपये की चिंता नहीं हुई। और अब जब आपदा एकदम दरवाजे पर आ चुकी है, तब इन्होंने सारी जिम्मेदारी जनता के ऊपर थोप दी है।

बता दें कि रविवार को हैदराबाद में पीएम मोदी (PM Modi) ने जनता से दुनियाभर की अपील की। कहा कि पेट्रोल और डीजल कम इस्तेमाल करो, सोना मत खरीदो, खाने का तेल 10% कम करो, विदेश घूमने मत जाओ, शादियाँ विदेश में मत करो, खाद का इस्तेमाल घटाओ। मतलब मोदी जी का जनता से साफ-साफ कहना है कि तुम सब कष्ट सहो, हमारी गलतियों की सजा अब तुम भुगतो।


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