Rahul Gandhi

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Rahul Gandhi से बड़ा चाणक्य, इस समय भारतीय राजनीति में और कोई नहीं है। यह अब पूरी तरह से साबित भी हो गया है। पहले तमिलनाडु और फिर केरल में Rahul Gandhi ने जो सियासी खेल किया है, उससे अगले विधानसभा चुनावों और आगामी लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रभाव पड़ने वाला है। इस रणनीति ने बीजेपी खेमे में खलबली मचा दी है और उनकी हालत खराब होने वाली है।

केरल में कांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी और जनभावना का सम्मान

केरल का मामला ही देख लीजिए, जहां कांग्रेस ने 102 सीटों के साथ ऐतिहासिक वापसी की है। इस जीत के पीछे केसी वेणुगोपाल ने अथाह काम किया था और दिन-रात एक कर दिया था। हर किसी को लग रहा था कि वेणुगोपाल ही केरल के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे। Rahul Gandhi और वेणुगोपाल की मित्रता भी बहुत गहरी है और वह खुद चाहते थे कि वेणुगोपाल को ही यह जिम्मेदारी मिले। लेकिन असली जननायक वही है जो जनता की आवाज सुने और लोकतंत्र का सम्मान करे।

दोस्ती पर भारी पड़ा लोकतंत्र और वीडी सतीशन का चयन

केरल की जनता और कार्यकर्ताओं की पहली पसंद वीडी सतीशन थे। Rahul Gandhi ने यहां अपनी गजब की चाणक्य नीति दिखाई। उन्होंने अपने चहेते मित्र वेणुगोपाल को बड़े प्यार से बैठाकर मनाया और अंत में वही फैसला लिया जो जनता चाहती थी। वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाया गया और वेणुगोपाल भी बिना किसी नाराजगी के खुशी-खुशी उनके साथ खड़े रहे। यह Rahul Gandhi का बड़प्पन और रणनीति ही है जिसने केरल में कांग्रेस के कुनबे को बिखरने नहीं दिया और बीजेपी के लिए नफरत के सारे रास्ते बंद कर दिए।

तमिलनाडु में मास्टरस्ट्रोक और थलापति विजय का उदय

अब बात करते हैं तमिलनाडु की, जहां Rahul Gandhi ने ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला जिसकी कल्पना भी बीजेपी ने नहीं की होगी। तमिलनाडु में Rahul Gandhi ने खुद को पीछे रखा और थलापति विजय को आगे कर दिया। यह एक सोची-समझी प्लानिंग थी क्योंकि वह जानते थे कि तमिलनाडु की अस्मिता के लिए विजय एक बड़ा चेहरा हैं। नतीजा यह रहा कि विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें ले आई और अब कांग्रेस के समर्थन से वहां एक मजबूत सरकार चल रही है।

दक्षिण भारत से बीजेपी का सफाया और गठबंधन की शक्ति

Rahul Gandhi के इसी त्याग और विजन का असर है कि आज आंध्र प्रदेश को छोड़कर पूरे दक्षिण भारत से बीजेपी का सूपड़ा साफ हो चुका है। कर्नाटक, तेलंगाना, केरल और अब तमिलनाडु, हर जगह Rahul Gandhi की ‘मोहब्बत की दुकान’ ने बीजेपी के ध्रुवीकरण को फेल कर दिया है। उन्होंने साबित कर दिया कि राजनीति सिर्फ कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि सही गठबंधन और सही नियत के लिए की जाती है। आज की भारतीय राजनीति में Rahul Gandhi से बड़ा चाणक्य और कोई नहीं है।

स्वघोषित चाणक्य बनाम असली जननायक की राजनीति

कुछ लोग तो ‘स्वघोषित चाणक्य’ बने फिरते हैं, जिन्हें Rahul Gandhi की इस ऊंचाई तक पहुंचने में 10 जन्म लग जाएंगे। जी हां, हम बात कर रहे हैं अमित शाह की, जिनके बारे में अंधभक्त सीना फुलाते हैं, लेकिन यह नहीं बता पाते कि वह जीत वोट चोरी और सरकारी संस्थाओं के दबाव से आती है। असली चाणक्य वह है जिसके पास राजनीति की अच्छी समझ हो। Rahul Gandhi ने अपनी तपस्या, भारत जोड़ो यात्रा और अब अपनी चाणक्य नीति से यह साफ कर दिया है कि आने वाला समय उनका है। 2026 की यह जीत तो बस शुरुआत है, जो दिल्ली के तख्त को हिलाने के लिए तैयार है।


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