Narendra Modi
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Narendra Modi ने एक बार फिर देश की ज्वलंत समस्याओं को पीछे छोड़कर विदेशी सरजमीं की ओर रुख किया है। 25-26 फरवरी 2026 की तारीखें पहले से ही तय थीं और प्रधानमंत्री बुधवार सुबह इजरायल के लिए रवाना हो गए। एक तरफ देश का युवा बेरोजगारी और आम आदमी कमरतोड़ महंगाई से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर Narendra Modi की प्राथमिकताएं विदेशी दौरों और वैश्विक ‘दोस्ती’ निभाने तक सीमित नजर आ रही हैं।
विवादित फाइल्स और युद्ध के बीच इजरायल जाने की जल्दबाजी
यह वही इजरायल है जिसके साथ Narendra Modi के रिश्तों की चर्चा अक्सर होती रहती है। सोशल मीडिया पर कुख्यात ‘एप्सटीन फाइल्स’ को लेकर किए गए दावों ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं, जिसके बारे में अब देश की जागरूक जनता भी सवाल पूछने लगी है। इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इजरायल खुद गाजा के साथ भीषण युद्ध में उलझा हुआ है, तब Narendra Modi वहां जाने के लिए इतने उतावले क्यों हैं?
क्या सुरक्षा के खतरों के बीच यह ‘गुप्त सेटिंग’ का दौरा है?
नवंबर 2025 में जब इजराइली पीएम नेतन्याहू ने दिल्ली में सुरक्षा का हवाला देकर अपना भारत दौरा रद्द कर दिया था, तब क्या Narendra Modi को इस बात का इल्म नहीं है कि आज इजरायल में चारों तरफ बारूद की गंध है? आलोचकों का मानना है कि यह दौरा सिर्फ डिप्लोमेसी नहीं, बल्कि अपने खास व्यापारिक मित्रों के हितों को सुरक्षित करने की एक गुप्त सेटिंग हो सकती है। Narendra Modi पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे अडानी ग्रुप के ‘ग्लोबल एजेंट’ के रूप में काम कर रहे हैं।
जनता की गाढ़ी कमाई: विदेशी दौरों पर करोड़ों का धुआं
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि Narendra Modi ने देश की जनता की गाढ़ी कमाई को विदेशी दौरों पर पानी की तरह बहाया है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच प्रधानमंत्री ने विदेशी यात्राओं पर लगभग 462.58 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इन चार सालों में Narendra Modi ने 43 देशों की यात्रा की। वे अमेरिका के इस कदर मुरीद हैं कि वहां के 4 चक्करों पर ही 74 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। यहाँ तक कि फरवरी 2025 के फ्रांस दौरे पर भी Narendra Modi ने एक समिट और डिनर के नाम पर 25.5 करोड़ रुपये उड़ा दिए।
‘नेशन फर्स्ट’ या ‘अडानी फर्स्ट’? दौरों के पीछे का बड़ा खेल
देखा जाए तो इन दौरों का सबसे बड़ा लाभ अडानी समूह को मिलता नजर आता है। Narendra Modi जिस भी देश के दौरे पर जाते हैं, वहां से अडानी ग्रुप के लिए कोई न कोई बड़ी डील निकलकर सामने आती है। चाहे वह ऑस्ट्रेलिया की खदानें हों, श्रीलंका का पोर्ट हो या मलेशिया का हालिया दौरा, Narendra Modi की यात्राओं के बाद अडानी ग्रुप को अक्सर बड़े जैकपॉट मिलते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘राष्ट्रवाद’ के चोले में ‘मित्रवाद’ का धंधा
केन्या से लेकर बांग्लादेश तक, Narendra Modi की इन व्यापारिक डील्स ने भारत के आत्मसम्मान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चोट पहुंचाई है। केन्या में तो भारतीयों को ‘गो बैक इंडिया’ जैसे नारों का सामना करना पड़ा। आज पूरी दुनिया देख रही है कि ‘राष्ट्रवाद’ के चोले के पीछे असल में ‘मित्रवाद’ का धंधा फल-फूल रहा है। 140 करोड़ भारतीयों की सेवा का दावा करने वाले Narendra Modi आज एक पूंजीपति मित्र की मार्केटिंग में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।
जनता मांग रही हिसाब, पर प्रधानमंत्री फिर उड़ान भरने को तैयार
जनता अब Narendra Modi से इस फिजूलखर्ची और साठगांठ का हिसाब मांग रही है। लेकिन प्रधानमंत्री इस पर जवाब देने के बजाय एक बार फिर इजरायल की यात्रा पर निकल पड़े हैं। क्या Narendra Modi के इस दौरे से देश के आम आदमी का कोई भला होगा या फिर यह भी केवल एक खास मित्र के साम्राज्य विस्तार की कड़ी मात्र बनकर रह जाएगा?
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