Petrol Price Hike

Petrol Price Hike

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Petrol Price Hike: क्या पेट्रोल-डीजल के दाम अभी और बढ़ने वाले हैं? क्या महंगाई और आसमान छूने वाली है? क्या भारत के लोगों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि होर्मुज में नाकेबंदी की वजह से दुनिया भर में तेल का संकट गहराता जा रहा है। भारत में अभी तक रूसी तेल की वजह से कुछ राहत थी, लेकिन अब वो भी बंद हो गई है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की जो इजाजत भारत को दी थी, वो 16 मई को खत्म हो गई। इसका मतलब है कि अब भारत कच्चा तेल सस्ते दाम पर नहीं खरीद पाएगा। धीरे-धीरे तेल की कमी बढ़ेगी और उसके साथ दाम भी बढ़ेंगे।

कच्चे तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है भारत

भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या निर्भरता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। तेल की कीमतों में कोई भी लगातार बढ़ोतरी सीधे महंगाई, सरकारी फाइनेंस, घरेलू बजट और आर्थिक विकास पर असर डालती है। छूट के समय में भारत रूसी क्रूड पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया था। केप्लर के डेटा के मुताबिक मई में भारत का रूसी तेल का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 2.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया। कुछ महीनों में भारत के कुल तेल आयात में रूसी क्रूड का हिस्सा लगभग आधा हो गया था।

रूस ने की अब तक मदद

रूस के सस्ते तेल ने भारत को लंबे समय तक महंगाई से बचने में मदद की। लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है क्योंकि अमेरिका की छूट का समय समाप्त हो चुका है।दरअसल जब दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं तो उन्हें कंट्रोल करने के लिए अमेरिका ने 5 मार्च को भारत को छूट दी। इस छूट के जरिए भारत उन रूसी तेल के जहाजों को खरीद सकता था जो प्रतिबंधों की वजह से फंसे हुए थे। बाद में इस छूट को सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बढ़ा दिया गया और इसकी आखिरी तारीख 16 मई तय की गई।

खत्म हुई समयसीमा (Petrol Price Hike)

अब ये समयसीमा खत्म हो गई है और अमेरिका की तरफ से इसे आगे बढ़ाने पर कुछ नहीं कहा गया है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से पहले से ही दुनिया में तेल महंगा हो रहा है और दूसरी तरफ रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भी रुक सकता है। ऐसे में अगर भारत को बाहर से महंगा तेल खरीदना पड़ा तो तेल कंपनियों की कमाई कम हो जाएगी। आखिरकार इस नुकसान की भरपाई आम लोगों से ही की जाएगी। यानी पेट्रोल और डीजल की कीमतें (Petrol Price Hike) बढ़ सकती हैं और लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

क्या कर रही मोदी सरकार?

अब बात सरकार की। आखिर भारत सरकार ने इस समस्या (Petrol Price Hike) से निपटने के लिए क्या किया? जवाब है कुछ नहीं, शून्य। 56 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहे थे। अपने ही मित्र देश रूस से तेल खरीदने की इजाजत अमेरिका से मांग रहे थे। जब 16 मई को छूट खत्म हुई तो मोदी सरकार ने अमेरिका से रिक्वेस्ट की कि ये छूट और कुछ दिनों के लिए बढ़ा दी जाए। लेकिन अमेरिका ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।

विदेशी दौरे पर निकले मोदी

अब जहां मोदी जी को इस पर काम करना चाहिए था, वहां वो विदेश निकल गए। जी हां, मोदी जी 15 से 20 मई के बीच 5-5 देशों के भ्रमण पर निकल चुके हैं जिसमें संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे देश शामिल हैं। मतलब देश मुसीबत में है, तेल की किल्लत (Petrol Price Hike) शुरू होने वाली है, तब हमारे प्रधानमंत्री जिनके ऊपर देश संभालने की जिम्मेदारी है, वो विदेश में सैर-सपाटा कर रहे हैं। जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये अपनी मौज-मस्ती में फूंक रहे हैं।

वैसे जानकारी के लिए बता दें कि 2015 से लेकर 2025 तक यानी पिछले 10 सालों में प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों पर 762 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं। अगर सिर्फ पिछले 4 सालों की बात करें यानी 2021 से 2025 के बीच तो 43 देशों की यात्रा पर 462.58 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए।

अब आप पूछेंगे कि इन यात्राओं से भारत की जनता को क्या मिला तो जवाब होगा कुछ नहीं। हर कुछ महीने पर मोदी जी विदेशी यात्रा पर निकल जाते हैं लेकिन उसका कोई फायदा जनता को नहीं मिलता। इस बार भी देश महंगाई (Petrol Price Hike) की मार झेल रहा है तो प्रधानमंत्री मौज करने निकल चुके हैं।


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