PM Modi
PM Modi की विदेश यात्राओं को लेकर इस समय देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां देश का युवा सड़कों पर रो रहा है और छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, वहीं महंगाई से जनता पूरी तरह त्रस्त है। लेकिन इसके बावजूद देश के प्रधान सेवक अपना ‘फकीरों वाला झोला’ उठाकर एक बार फिर विदेश दौरे पर निकल गए हैं।
इस समय सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो नीदरलैंड से सामने आया है, जिसे खुद उन्होंने भी बड़े चाव से शेयर किया है। इस वीडियो में वे बकायदा नाच-गाने का लुत्फ उठा रहे हैं, ताली बजा रहे हैं और मुस्कुरा रहे हैं।
विदेशी दौरों के असली मकसद पर जनता के सवाल
अब जनता सरकार से सीधे सवाल पूछ रही है कि आखिर PM Modi के इन विदेशी दौरों का असली मकसद क्या है? क्या सिर्फ विदेश जाकर रंगारंग कार्यक्रम देखना, हाहा-हीही करना और वहां से अपनी रील्स और वीडियो पोस्ट करना ही उनका मुख्य उद्देश्य रह गया है?
हर विदेशी दौरे की आज यही कहानी बनकर रह गई है कि वहां ढोल-नगाड़े बजते हैं, सांस्कृतिक डांस होता है और हमारे प्रधानमंत्री उसमें पूरी तरह मग्न हो जाते हैं। आम जनता का पूछना है कि इस चमक-दमक से देश के आम नागरिक को क्या फायदा मिल रहा है, लेकिन इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि PM Modi की इस कार्यशैली पर अब तीखे सवाल खड़े होने लगे हैं।
यूएई में बयानबाजी और डिप्लोमेसी पर हैरानी
नीदरलैंड पहुंचने से पहले वे यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात में रुके थे और वहां उन्होंने जो बातें कहीं, उसे सुनकर लोग हैरान हैं। यूएई की धरती पर जाकर PM Modi ने कुछ ऐसी बातें कह दीं जिससे कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने एक तरफ तो इजरायल को ‘फादरलैंड’ जैसी संज्ञा दे दी, और दूसरी तरफ यूएई को अपना ‘दूसरा घर’ बता दिया।
आम जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब यह पूछ रहे हैं कि आखिर डिप्लोमेसी के नाम पर यह कैसी बयानबाजी है? लोगों का मानना है कि PM Modi को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की गरिमा के अनुरूप ही संतुलित वक्तव्य देने चाहिए।
विदेशी दौरों पर करोड़ों का खर्च और शून्य नतीजा
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू इन यात्राओं पर होने वाला भारी-भरकम खर्च है। असल बात तो यह है कि पिछले 5 सालों में PM Modi के इन विदेशी दौरों पर देश की गाढ़ी कमाई के 462 करोड़ रुपये से ज्यादा फूंक दिए गए। जी हां, जनता के टैक्स का 462 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च किया गया, लेकिन इसका नतीजा हमेशा ‘ढाक के तीन पात’ ही निकला है।
देश को इन दौरों से कोई बड़ा आर्थिक या रणनीतिक फायदा होता हुआ नहीं दिख रहा है। साफ है कि PM Modi सिर्फ बड़े-बड़े इवेंट और रंगारंग कार्यक्रम अटैंड करने विदेश जाते हैं, जिसका सीधा फायदा शायद देश को मिलने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों को ही मिलता है।
नीट पेपर लीक और देश के छात्रों का अंधकारमय भविष्य
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री विदेश में डांसरों का हौसला बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अगर देश के अंदरूनी हालात को देखें तो स्थिति बेहद भयावह है। अपने ही देश में नीट (NEET) पेपर लीक मामले के बाद लाखों छात्रों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में डूब चुका है।
कई मासूम बच्चे इस गंभीर मानसिक तनाव को न झेल पाने के कारण आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा रहे हैं। उनके माता-पिता रो रहे हैं और बिलख रहे हैं, लेकिन PM Modi के पास इन रोते हुए छात्रों के आंसू पोंछने का वक्त नहीं है। देश का युवा आज खुद को पूरी तरह से असहाय और ठगा हुआ महसूस कर रहा है, क्योंकि PM Modi इस राष्ट्रीय संकट पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।
महंगाई की चौतरफा मार और जनता में हाहाकार
छात्रों के संकट के साथ-साथ देश की जनता इस वक्त महंगाई की चौतरफा मार भी झेल रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे मालभाड़ा बढ़ गया है और हर छोटी-बड़ी आवश्यक चीज महंगी हो चुकी है। देश भर में आर्थिक संकट को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह से चरमरा चुकी है।
आज के इस आधुनिक दौर में भी गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों को रसोई गैस के सिलेंडरों के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। एक तरफ रसोई गैस के लिए हाहाकार है, पेट्रोल की कीमतों से जनता त्रस्त है और छात्र खुदकुशी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हमारे प्रधानमंत्री विदेश में बैठकर आराम से डांस देख रहे हैं। देश आज PM Modi से सीधे सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक जनता के पैसों पर यह विदेशी इवेंट management चलता रहेगा?
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