America

America

Share this news :

America से एक ऐसी खबर आई है जो हजारों भारतीय परिवारों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रही है। दुनिया के छठे सबसे अमीर कारोबारी लैरी एलिसन की कंपनी ओरेकल ने एक साथ 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि इनमें से 12 हजार केवल भारतीय कर्मचारी हैं। यानी छंटनी की सबसे बड़ी मार हमारे देश के युवाओं पर पड़ी है।

सुबह 6 बजे जब कर्मचारियों के इनबॉक्स में टर्मिनेशन लेटर आया, तो कुछ ही मिनटों में उनका सिस्टम एक्सेस भी छीन लिया गया। यह वही अमेरिका है जिसके साथ मोदी सरकार दोस्ती के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत में वहां की कंपनियां भारतीयों को दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकाल रही हैं।

वैश्विक गैस संकट और America की कंपनियों का भारतीयों पर प्रहार

एक तरफ दुनिया भीषण गैस संकट और बढ़ती महंगाई की दोहरी मार झेल रही है, जिससे लोगों की रोजी-रोटी पर संकट गहरा रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका की दिग्गज कंपनियां भारतीयों को सबसे पहले निशाना बना रही हैं।

ट्रंप प्रशासन के दौर में जिस तरह से भारत का अपमान करने की कोशिशें हुईं, अब वहां का कॉर्पोरेट जगत भी उसी राह पर चलता दिख रहा है। सवाल यह है कि आखिर मोदी सरकार की विदेश नीति इन आईटी प्रोफेशनल्स के हितों की रक्षा करने में विफल क्यों साबित हो रही है? क्या विदेशी दौरों का मकसद सिर्फ फोटो खिंचवाना है, जबकि हकीकत में America में बैठा भारतीय आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है?

America में भारतीय टैलेंट का संकट और बेरोजगारी के डरावने आंकड़े

अगर आंकड़ों की बात करें तो पिछले तीन सालों में केवल America की कंपनियों ने 1 लाख से ज्यादा भारतीयों को सड़क पर ला खड़ा किया है। अकेले 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही ओरेकल, अमेजन और मेटा जैसी कंपनियों ने मिलकर करीब 20 हजार से ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स को बेरोजगार कर दिया है। जो युवा लाखों का लोन लेकर सुनहरे भविष्य का सपना देख कर अमेरिका गए थे, आज वहां की सड़कों पर अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों से लेकर यूरोप तक अब तक करीब 1.5 लाख से ज्यादा भारतीय इस ग्लोबल लेऑफ की बलि चढ़ चुके हैं।

America के वीजा नियमों का चक्रव्यूह और भारतीय इंजीनियरों की बेबसी

खास तौर पर America की बात करें तो पिछले कुछ सालों में वहां करीब 1 लाख 20 हजार भारतीयों को नौकरी से बेदखल किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा मार उन एच-1बी वीजा धारकों पर पड़ी है, जिन्हें नौकरी जाने के महज 60 दिनों के भीतर दूसरा काम ढूंढना होता है। वरना उन्हें बेइज्जत होकर America से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ता है। केवल कैलिफोर्निया और टेक्सास जैसे आईटी हब्स में ही हजारों भारतीय इंजीनियर आज एआई और इनविजिबल लेऑफ की राजनीति का शिकार होकर घर बैठने को मजबूर हैं।

America में बैठा हर तीसरा भारतीय आज इस खौफ में जी रहा है कि कल सुबह का सूरज उसके लिए कोई बुरी खबर न ले आए।

विश्वगुरु का दंभ और America में भारतीयों का होता अपमान

जब ग्लोबल मार्केट में भारतीय टैलेंट सबसे असुरक्षित शिकार बन चुका है, तब विश्वगुरु बनने का दंभ भरने वाली सरकार की चुप्पी समझ से परे है। America के साथ जिस दोस्ती का ढोल पीटा जाता है, वह इन युवाओं के करियर को बचाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। गैस संकट के बीच हजारों भारतीयों का इस तरह बेरोजगार होना सिर्फ एक कंपनी का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर कूटनीतिक विफलता है।

मोदी सरकार को यह जवाब देना होगा कि आखिर उनकी कमजोर पड़ती विदेश नीति के चलते भारतीय युवाओं के भविष्य के साथ America की धरती पर यह खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा?

कठिन समय में सरकार की जिम्मेदारी और युवाओं का भविष्य

क्या हम सिर्फ डिजिटल इंडिया के आंकड़े गिनते रहेंगे या इन युवाओं के करियर और सम्मान की सुरक्षा की गारंटी भी तय करेंगे? आज जब America में काम करने वाले भारतीयों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है, तब सरकार को अपनी कूटनीति का परिचय देना चाहिए। केवल विदेशी निवेश की बात करना काफी नहीं है, बल्कि उन युवाओं का संरक्षण भी जरूरी है जो देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं।

America की कंपनियों द्वारा की जा रही यह मनमानी भारत की विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिस पर तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।


Also Read

Assam चुनाव सर्वे: क्या 30 सीटों पर सिमट जाएगी बीजेपी?

मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *