Rahul Gandhi

Rahul Gandhi

Share this news :

Rahul Gandhi ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से यह साबित कर दिया है कि केरल की राजनीति में नफरत का कोई स्थान नहीं है। आज जो चुनावी परिणाम दुनिया के सामने हैं, वे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि देश के सबसे साक्षर राज्य की जागरूक जनता ने ‘घटिया सोच’ और ‘सांप्रदायिक एजेंडे’ को सिरे से नकार दिया है। केरल में कांग्रेस समर्थित यूडीएफ (UDF) ने जो क्लीन स्वीप किया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे Rahul Gandhi और प्रियंका गांधी का वह अथक परिश्रम है, जो पिछले कई महीनों से केरल की गलियों और गांवों में निरंतर दिख रहा था।

राहुल और प्रियंका की रैलियों ने पलटा पासा

इस जीत की मजबूत इबारत Rahul Gandhi ने अपनी 12 से ज्यादा बड़ी रैलियों और रोड शो के जरिए लिखी है। 25 मार्च को कोझिकोड बीच पर उमड़ा जनसैलाब आज वोट बनकर पेटी से बाहर निकल रहा है। वहीं प्रियंका गांधी ने भी कंधे से कंधा मिलाकर 10 से ज्यादा तूफानी रैलियां कीं। थवनूर से लेकर निलंबूर तक प्रियंका गांधी ने जिस तरह महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद किया, उसने पूरे माहौल को कांग्रेस के पक्ष में मोड़ दिया। इस रणनीति को Rahul Gandhi के विश्वसनीय सिपाही और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीछे से ताकत दी, जिन्होंने हर एक सीट का माइक्रो-मैनेजमेंट किया।

लेफ्ट और बीजेपी की सांठ-गांठ का पर्दाफाश

चुनाव प्रचार के दौरान Rahul Gandhi ने जो सबसे बड़ा हमला बोला, वह लेफ्ट (LDF) और बीजेपी के बीच का गुप्त समझौता था। उन्होंने डंके की चोट पर सवाल उठाया था कि आखिर क्या वजह है कि केंद्र सरकार अन्य विपक्षी नेताओं पर तो रेड डलवाती है और उन्हें जेल भेजती है, लेकिन केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ जांच एजेंसियां खामोश क्यों हैं। Rahul Gandhi का यह दावा कि ‘बीजेपी और लेफ्ट एक ही सिक्के के दो पहलू हैं’, जनता के दिल में गहराई तक उतर गया। लोगों ने यह भली-भांति समझ लिया कि कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है जो इन दोनों शक्तियों से मजबूती से लड़ सकती है।

वायनाड के प्रति अटूट समर्पण का मिला फल

सबसे बड़ी बात जो Rahul Gandhi के पक्ष में गई, वह उनका वायनाड के प्रति निस्वार्थ समर्पण था। जुलाई 2024 के भीषण भूस्खलन के वक्त Rahul Gandhi ने राजनीति से ऊपर उठकर एक बेटे और भाई का फर्ज निभाया था। चाहे संसद में वायनाड के हक के लिए लड़ना हो या फिर 2026 की शुरुआत में ही 100 घरों की आधारशिला रखना हो, जनता ने सब देखा। केरल के लोगों ने महसूस किया कि जब वे सबसे बड़ी मुसीबत में थे, तब दिल्ली से सिर्फ Rahul Gandhi और प्रियंका गांधी ही उनके आंसू पोंछने जमीन पर आए थे। इसी भावनात्मक लगाव का परिणाम है कि आज पूरा केरल उनकी सोच के साथ खड़ा है।

प्रोपेगेंडा और नफरत की राजनीति की करारी हार

बीजेपी ने केरल की छवि बिगाड़ने के लिए ‘दी केरला स्टोरी’ जैसी फिल्में और नाम बदलने की राजनीति का सहारा लिया, लेकिन Rahul Gandhi के नेतृत्व में कांग्रेस ने विकास की बात की। केरल देश का सबसे साक्षर राज्य है और वहां के लोग प्रोपेगेंडा और हकीकत के बीच का अंतर जानते हैं। केरल में मटन-मुर्गा-मछली या हिंदू-मुसलमान के नाम पर वोट नहीं डाला जाता है। यही वजह है कि अमित शाह और मोदी की हर चाल वहां नाकाम साबित हुई और बीजेपी अपना खाता खोलने के लिए भी संघर्ष करती रह गई। नफरत की खेती के लिए केरल की जमीन कभी उपजाऊ नहीं रही है और Rahul Gandhi ने इसे बखूबी समझा।

विश्वसनीयता की जीत और विरोधियों पर करारा तमाचा

अंततः कांग्रेस की इस प्रचंड जीत में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ से कहीं ज्यादा Rahul Gandhi की ‘विश्वसनीयता’ ने मुख्य भूमिका निभाई है। साल 2026 के इन चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केरलम में अब सिर्फ पंजे का शासन होगा। यह जीत उन ताकतों के गाल पर एक जोरदार तमाचा है जो नफरत और विभाजन के दम पर सत्ता हथियाने का सपना देख रहे थे। Rahul Gandhi के अथक परिश्रम और विजन ने केरल की राजनीति को एक नई और सकारात्मक दिशा देने का काम किया है, जिससे कांग्रेस का आधार और भी मजबूत हुआ है।


Read More

केरल में आज तो क्या, कभी नहीं आ सकती BJP; ये है इसकी सबसे बड़ी वजह

मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *