Ethanol
Ethanol सरकार की नई नीतियों का एक मुख्य केंद्र बन चुका है, लेकिन इसके पीछे छिपे आर्थिक और तकनीकी पहलुओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भारतीय बाजार में वर्तमान में उपयोग हो रहे 20 फीसदी मिश्रित ईंधन के बाद अब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक नया बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। सरकार अब सीधे 85 फीसदी ethanol वाले ईंधन यानी E85 फ्यूल को बाजार में उतारने की व्यापक योजना बना रही है। सरकार का तर्क है कि ऑटोमोबाइल कंपनियां इसके लिए विशेष रूप से नए इंजन का निर्माण करेंगी और यह आम उपभोक्ताओं के लिए काफी सस्ता साबित होगा। हालांकि, इस ‘सस्ते’ विकल्प के पीछे छिपी जमीनी हकीकत और आम जनता की गाड़ियों पर पड़ने वाला इसका असर बेहद चिंताजनक दिखाई दे रहा है।
जल संकट और खेती पर पड़ता विपरीत असर
इस नीति का सबसे संवेदनशील और नकारात्मक पहलू देश के प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव है। पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों के अनुसार, महज 1 लीटर ethanol का उत्पादन करने के लिए लगभग 10,790 लीटर पानी की भारी मात्रा को बहा दिया जाता है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में, जहां आज भी देश के कई हिस्सों में किसान सिंचाई और पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहां चावल और गन्ने जैसी फसलों को इस तरह ईंधन की भट्टी में झोंका जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि यह नीति देश को एक बड़े और गंभीर सूखे के संकट की ओर धकेलने का काम कर सकती है।
गरीबों के अनाज और खाद्य सुरक्षा पर सवाल
इसके अलावा, इस ईंधन नीति के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर भी तीखी बहस छिड़ गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि देश के गरीब और जरूरतमंद तबके के खाद्य अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। Ethanol निर्माताओं को लाभ पहुंचाने के लिए कथित तौर पर बड़े पैमाने पर चावल आवंटित किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। जनता के एक वर्ग का मानना है कि जो अनाज किसी गरीब परिवार की भूख मिटाने के काम आना चाहिए था, उसे व्यावसायिक डिस्टिलरीज को सौंपा जा रहा है ताकि वहां व्यावसायिक स्तर पर ईंधन का उत्पादन किया जा सके।
गडकरी परिवार से जुड़ी कंपनियों का बढ़ता व्यापार
इस पूरे मामले में राजनीतिक और व्यापारिक सांठगांठ के आरोप भी तेजी से सामने आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बेटों से जुड़ी कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों में आई भारी उछाल इस विवाद को और हवा दे रही है। उनके बड़े बेटे निखिल गडकरी की कंपनी ‘CIAN एग्रो इंडस्ट्रीज’ का रेवेन्यू जो साल 2024 में बेहद सीमित था, वह जून 2025 तक बढ़कर सैकड़ों करोड़ रुपये पर पहुंच गया और इसके शेयर की कीमतों में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, उनके छोटे बेटे सारंग गडकरी की गैर-सूचीबद्ध कंपनी ‘मानस एग्रो’ का रेवेन्यू भी बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है, जो मुख्य रूप से ethanol उत्पादन के क्षेत्र में सक्रियता का परिणाम माना जा रहा है।
गाड़ियों के इंजनों और माइलेज को होने वाला नुकसान
उपभोक्ताओं के स्तर पर देखा जाए तो वर्तमान गाड़ियों के इंजन के लिए ethanol मिश्रित पेट्रोल बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। इसके इस्तेमाल से पुरानी कारों और बाइकों की ईंधन टंकियों के अंदर नमी जमा होने, जंग लगने और फ्यूल लीकेज की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। तकनीकी रूप से, इस मिश्रित ईंधन में सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 33 फीसदी कम ऊर्जा होती है, जिसके कारण वाहनों का माइलेज बुरी तरह गिर जाता है। अभी जनता 20 फीसदी मिश्रण से ही गाड़ियों की कार्यक्षमता में आ रही कमी और बढ़े हुए खर्च से परेशान है।
E85 ईंधन के आने से भविष्य की बड़ी चुनौतियां
भविष्य में जब E85 ईंधन पूरी तरह से बाजार में आ जाएगा, तब ऑटोमोबाइल सेक्टर और आम उपभोक्ताओं के सामने चुनौतियां और अधिक विकराल हो जाएंगी। इतनी बड़ी मात्रा में ethanol का उपयोग करने के लिए वर्तमान में चल रही अधिकांश गाड़ियां पूरी तरह अनुपयुक्त हो जाएंगी, जिससे वे कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर पहुंच सकती हैं। उपभोक्ताओं को मजबूरन नई गाड़ियां खरीदनी पड़ेंगी, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के घरेलू बजट पर एक बहुत बड़ा वित्तीय बोझ पड़ना तय है।
कारोबारी मुनाफे और रॉकेट की रफ्तार से उड़ता बिजनेस
इस पूरी नीति का अंतिम विश्लेषण यही संकेत देता है कि जहां एक तरफ आम जनता अपनी गाड़ियों के रखरखाव और घटते माइलेज से त्रस्त रहेगी, वहीं दूसरी तरफ इस उद्योग से जुड़े चुनिंदा बड़े पूंजीपतियों का मुनाफा असाधारण रूप से बढ़ता जाएगा। बाजार में E85 ईंधन के आने के बाद ethanol बनाने वाली बड़ी कंपनियों और इससे जुड़े व्यवसायों को एकतरफा फायदा मिलने की उम्मीद है। परिणामस्वरूप, आम जनता की जेब खाली होती रहेगी और इस विशिष्ट क्षेत्र में सक्रिय बड़े कारोबारी घरानों का बिजनेस आने वाले समय में रॉकेट की रफ्तार से आसमान छूता रहेगा।
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