Yoga Day

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Yoga Day के मौके पर आज पूरी दुनिया योग की बात कर रही है, लेकिन हमारे देश में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के लिए यह दिन राजनीति और प्रोपेगैंडा चमकाने का एक जरिया बन गया है। सुबह से ही सोशल मीडिया पर Yoga Day के नाम पर नेताओं की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, उन्हें देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन नेताओं को योग के नियमों से ज्यादा कैमरे के एंगल की फिक्र रहती है। इस खास मौके पर विपक्षी दलों और आम जनता ने बीजेपी के दोहरे मापदंडों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

कैमरे के सामने योग कम, कॉमेडी ज्यादा

इस सियासी ड्रामे की शुरुआत बिहार से होती है, जहां के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को देखकर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो रहे हैं, क्योंकि निशांत बाबू को योग करते समय शायद दाएं और बाएं का फर्क ही समझ नहीं आ रहा था। कार्यक्रम में मौजूद योगा टीचर चिल्ला-चिल्लाकर बोल रहे थे कि बाएं झुकिए, लेकिन हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी कतई लट्टू की तरह घूमकर दाएं झुक जा रहे थे। इस Yoga Day पर कैमरे के सामने मंत्री जी का यह तालमेल सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है।

पीएम मोदी के मेगा इवेंट और कैमरे की फौज

दूसरी तरफ, देश के मुखिया यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को सबसे बड़ा योगा टीचर साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। हर साल की तरह इस बार भी Yoga Day पर कैमरों की एक पूरी फौज तैनात की गई थी और ऐसी ब्रांडिंग की गई मानो योग की खोज ही पिछले कुछ सालों में हुई हो। जनता के बुनियादी मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई को दरकिनार कर इस सरकारी आयोजन को एक पीआर स्टंट में बदल दिया गया। आलोचकों का कहना है कि बीजेपी सरकार इस पावन दिन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी ब्रांडिंग और नौटंकी के लिए करती है।

मुंबई की मिनारा मस्जिद के बाहर सड़क पर योग

लेकिन इस Yoga Day की असली कहानी और बीजेपी का दोगलापन तब उजागर हुआ जब मुंबई से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया। मुंबई की मशहूर मिनारा मस्जिद के बाहर खुली सड़क पर बकायदा चटाइयां बिछाकर योगासन का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सोशल मीडिया पर विपक्षी पार्टियों ने दावा किया है कि इस कार्यक्रम को आयोजित कराने के पीछे कोई और नहीं, बल्कि खुद बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे के लोग थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

नमाज और योग पर बीजेपी का दोहरा रवैया

सड़क पर हुए इस आयोजन को देखकर देश की जनता का माथा ठनक गया है और सबसे बड़ा सवाल बीजेपी के दोहरे मापदंड पर उठ रहा है। अगर इस देश में मुस्लिम समुदाय के लोग जगह न होने की मजबूरी में चंद मिनटों के लिए सड़क पर नमाज पढ़ लेते हैं, तो यही बीजेपी और दक्षिणपंथी संगठन आसमान सिर पर उठा लेते हैं। उस वक्त देश के कानून, नियमों और ट्रैफिक व्यवस्था की दुहाई दी जाती है तथा सड़कों को खाली कराने के लिए भारी बवाल काटा जाता है।

सियासी सहूलियत के हिसाब से नियमों का खेल

हैरानी की बात यह है कि जब वही सड़क होती है, वही जगह होती है और वही लोग होते हैं, बस फर्क इतना होता है कि वे नमाज की जगह बीजेपी के झंडे तले Yoga Day मना रहे होते हैं, तब सारे कानून और ट्रैफिक नियम हवा में उड़ जाते हैं। उस समय गोदी मीडिया और बीजेपी के नेताओं को कोई परेशानी नहीं होती है। क्या सड़क पर नमाज पढ़ने से ही ट्रैफिक जाम होता है, और जब बीजेपी के लोग सड़क घेरकर Yoga Day मनाते हैं तो गाड़ियां हवा में उड़ने लगती हैं? यह साफ दिखाता है कि बीजेपी सिर्फ अपनी सहूलियत के हिसाब से राजनीति करती है और देश यह दोगलापन अब और नहीं सहेगा।


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