Ram Mandir
Ram Mandir के नाम पर जिन लोगों ने सियासत की बड़ी-बड़ी दुकानें चमकाईं, जिसके नाम पर वोटों की फसल काटी गई और खुद को धर्म का इकलौता ठेकेदार साबित करने की होड़ मची रही, आज उसी पावन धाम से आस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। इस महाघोटाले पर लंबे समय तक सत्ता के गलियारों में सन्नाटा पसरा रहा।
दावों और वादों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली मोदी सरकार की नाक के नीचे रामलला के दानपात्रों में ही डाका डाल दिया गया। करोड़ों भक्तों ने जिस गाढ़ी कमाई को पूरी श्रद्धा से अर्पित किया था, उसे सफेदपोश चोर चट कर गए। जब इस महापाप पर चौतरफा फजीहत शुरू हुई, तो आखिरकार गहरी नींद से जागते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस को पहली बार सामने आना ही पड़ा।
महापाप पर आरएसएस का पहला कबूलनामा
संघ के जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसाबले ने बकायदा एक बयान जारी कर इस घटना पर अपनी लाचारी और गुस्सा दोनों जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि पर बना यह भव्य Ram Mandir पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों रामभक्तों के त्याग, तपस्या और बलिदान का केंद्र है। लेकिन वहां के दानपात्रों से हुई चोरी ने पूरे हिंदू समाज की भावनाओं और उनकी अटूट श्रद्धा को गहरी चोट पहुंचाई है।
होसाबले ने इस घटना को घोर निंदनीय बताते हुए मांग की है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। संघ ने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी जांच का हवाला देते हुए Ram Mandir प्रबंधन से भी कहा है कि वे अपनी व्यवस्थाओं और संचालन की कमियों को तुरंत दूर करें, ताकि भक्तों का भरोसा न टूटे। इसके साथ ही उन्होंने हिंदू समाज से इस मुश्किल वक्त में धैर्य रखने की अपील की है, ताकि कोई राष्ट्र विरोधी ताकत इसका फायदा न उठा सके।
सिर्फ बयानबाजी से नहीं बचेगी साख
लेकिन यहां सबसे बड़ा और तीखा सवाल तो यह उठता है कि क्या सिर्फ एक कड़ा बयान जारी कर देने भर से आरएसएस की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? जो संघ खुद को इस पूरे Ram Mandir आंदोलन का सबसे बड़ा सिपहसालार और भाग्यविधाता बताता आया है, आखिर उसकी नाक के नीचे इतनी बड़ी सुरक्षा चूक और करोड़ों की चोरी हो कैसे गई?
जब भव्य Ram Mandir के चंदे, उसके पाई-पाई के हिसाब और पूरी सुरक्षा का जिम्मा संघ से जुड़े चेहरों और उनकी ही परम प्रिय मोदी सरकार के हाथों में सुरक्षित था, तो फिर इस घोर लापरवाही का असली गुनहगार कौन है? जिस सिस्टम को रामलला की सुरक्षा का ढिंढोरा पीटने में महारत हासिल थी, वह करोड़ों भक्तों के समर्पण की हिफाजत करने में पूरी तरह नाकाम क्यों साबित हुआ? क्या इसे सिर्फ एक साधारण चोरी मानकर रफा-दफा किया जा सकता है, या फिर यह पूरी व्यवस्था की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है?
अखिलेश यादव के खुलासे से मचा हड़कंप
इस पूरे खेल की शुरुआत 7 जून को हुई, जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस गंभीर मामले को उठाया। विपक्ष के इस तीखे हमले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को आनन-फानन में विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन करना पड़ा। जांच आगे बढ़ी तो कुछ छोटे-मोटे आरोपियों को पकड़ा भी गया, लेकिन इस घोटाले की आंच जैसे ही ऊपर तक पहुंची, Ram Mandir ट्रस्ट के भीतर हड़कंप मच गया।
इसके बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत कई बड़े मगरमच्छ ट्रस्ट से इस्तीफा देकर पतली गली से निकल लिए। इन बड़े नामों के हटने से साफ हो गया कि Ram Mandir के भीतर चल रहा खेल बहुत ऊपर तक जुड़ा हुआ था।
पिछले 5 सालों के खातों का होगा री-ऑडिट
अब हालात यह हैं कि एसआईटी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पिछले पांच सालों के खातों का दोबारा ऑडिट करने की तैयारी में है। शुरुआती जांच में ही वित्तीय अनियमितताओं के ऐसे तगड़े संकेत मिले हैं, जिसने सबके होश उड़ा दिए हैं। इस पुन: ऑडिट के दायरे में सिर्फ Ram Mandir के दानपात्रों में आया कैश ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में हुआ खर्च और भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण भी शामिल हैं। साफ है कि आस्था की आड़ में चल रहा यह घोटाला बहुत गहरा है और इसकी जड़ें काफी मजबूत हैं।
क्या बेनकाब होंगे असली गुनहगार?
पवित्र Ram Mandir में हुई इस ऐतिहासिक चोरी के बाद अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि धर्म की आड़ में यह गंदा खेल करने वाले असली चोर कब बेनकाब होंगे? करोड़ों राम भक्तों की गाढ़ी कमाई और उनकी आस्था को लूटने वाले इन सफेदपोशों को क्या वाकई उनके कर्मों की सजा मिलेगी? या फिर हर बार की तरह इस बार भी इस महापाप को जांच के नाम पर बयानों की चादर तले दबा दिया जाएगा, जो काम करने में मोदी सरकार पहले से ही माहिर मानी जाती है।
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