Protest in Gujarat Against Adani
Protest in Gujarat Against Adani: अडानी के अपने राज्य में ही उनके खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। हम बात कर रहे हैं गुजरात की। जहां किसान अपने ही सरकार और अडानी के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। मोरबी जिले में, खासकर जेटपर गांव में किसानों का आंदोलन कई दिनों से चल रहा है। लेकिन टीवी चैनलों पर आपको ये खबर नहीं दिखी होगी।
क्या है किसानों की परेशानी? (Protest in Gujarat)
दरअसल ये आंदोलन कच्छ जिले के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी जोन से बिजली लाने के लिए बिछाई जा रही हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के खिलाफ है। अडानी समूह की कंपनी इन टावरों को किसानों की जमीन पर लगा रही है। इसके खिलाफ 17 जून से ही किसान अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 40 डिग्री की गर्मी में उपवास छावनी बनाकर ये लोग दिन रात प्रदर्शन (Protest in Gujarat) कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन पर टावर लगाए जा रहे हैं। टावर लगने के बाद उस जमीन पर खेती करना मुश्किल हो जाएगा। कोई खरीदार भी नहीं मिलेगा। लेकिन कंपनी और सरकार उन्हें नाममात्र का मुआवजा दे रही है।
उदाहरण के लिए, 65 साल के किसान रामजीभाई की 12 बीघा जमीन है। बाजार में उसकी कीमत करीब 40 लाख रुपये प्रति बीघा है। लेकिन 70 प्रतिशत जमीन टावर और लाइन की चपेट में आ रही है। फिर भी उन्हें सिर्फ 30 लाख रुपये कुल मुआवजा दिया जा रहा है। जो कि बेहद कम है।
मंत्री के भाई भी उतरे प्रदर्शन करने
इस आंदोलन (Protest in Gujarat) की गंभीरता इस बात से समझिए कि मोरबी के भाजपा विधायक और राज्य के श्रम, कौशल विकास और रोजगार मंत्री कांतिलाल अमृतिया के दो सगे भाई 57 वर्षीय राकेशभाई शिवलाल अमृतिया और 51 वर्षीय भरतभाई अमृतिया भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। राकेशभाई और भरतभाई कह रहे हैं कि उनके मंत्री भाई ने बात करने की कोशिश की, लेकिन ऊपर के स्तर पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही। इसके अलावा मोरबी जिले के 35 से ज्यादा सरपंचों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। महिलाएं और बच्चे भी इसमें शामिल हैं। पिछले दिनों तो पुलिस ने कई महिलाओं और बच्चों को हिरासत में भी लिया था।
9 जून को शुरु हुआ आंदोलन
बता दें कि आंदोलन (Protest in Gujarat) 9 जून को शुरू हुआ था। शुरू में प्रतीकात्मक भूख हड़ताल थी, लेकिन पुलिस से टकराव के बाद 17 जून से इसे अनिश्चितकालीन बना दिया गया। 19 जून को कई किसानों ने विरोध में मुंडन भी कराया। हर शाम छावनी में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। किसान जिंदाबाद के नारे लगते हैं। नुक्कड़ नाटक और भाषण होते हैं।
क्या है किसानों की मांगें?
देखिए, किसानों की मांगें एकदम साफ हैं। हमारी जमीन का सही बाजार मूल्य पता करने के लिए एक कमेटी बनाओ। टावर वाली जमीन के लिए बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दो। बिजली लाइन के नीचे वाली जमीन के लिए भी अच्छा मुआवजा दो। सारा पैसा एक साथ और पहले ही दे दो। मुआवजे की प्रक्रिया जिला कलेक्टर शुरू करे। और सरकार ऊर्जा विभाग के जरिए इसे लेकर साफ नियम बनाए। मतलब साफ है किसान अपनी जमीन गंवाना नहीं चाहते, लेकिन अगर जा भी रही है तो उचित दाम चाहिए।
किसानों के साथ गलत कर रही भाजपा सरकार
गुजरात में भाजपा सरकार हर बार की तरह इस बार भी अडानी को आगे बढ़ाने के लिए जनता का नुकसान कर रही है। अडानी के प्रोजेक्ट को रिन्यूएबल एनर्जी के नाम पर बढ़ावा दे रही है। लेकिन किसानों की जमीन छीनकर, उन्हें कम पैसा देकर ये विकास किसका हो रहा है? जब किसान सड़क (Protest in Gujarat) पर हैं, मंत्री के भाई भी धरने पर बैठे हैं, तब भी सरकार चुप है। सवाल उठता है क्या अडानी का प्रोजेक्ट किसानों से ज्यादा जरूरी है? बता दें कि ये आंदोलन सिर्फ मोरबी तक सीमित नहीं है। ये पूरे गुजरात के किसानों की आवाज है। छोटे किसान, जिनके पास सिर्फ 3-4 बीघा जमीन है और घर में छोटे बच्चे हैं, वो सबसे ज्यादा परेशान हैं। अगर उनकी खेती छिन जाएगी तो परिवार कैसे चलेगा?
Also Read-
पुत्र-मोह में पागल हुए गडकरी, इथेनॉल के चक्कर में कर रहे पर्यवारण और आम जनता का नुकसान
मोदी राज में 6.7 मिलियन बच्चों को पूरे दिन नहीं मिलता भोजन, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
