Rahul Gandhi
Rahul Gandhi के आक्रामक तेवरों और देश के युवाओं के बढ़ते दबाव के चलते केंद्र की मोदी सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। नीट महाघोटाले पर चौतरफा घिरी सरकार की घबराहट इस कदर बढ़ गई है कि कभी रात 8 बजे टीवी पर आकर बड़े-बड़े ऐलान करने वाले प्रधानमंत्री को 23 जुलाई की आधी रात 12 बजे सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी करना पड़ा। जब लाखों छात्रों का भविष्य सरेआम नीलाम हो रहा था, तब सरकार पूरी तरह खामोश थी। लेकिन जैसे ही Rahul Gandhi ने सरकार की घेराबंदी तेज की, प्रधानमंत्री को आधी रात को जागकर कड़ा कानून लाने का वादा करना पड़ा। यह देश के युवाओं की एकजुट ताकत और विपक्ष का खौफ ही है।
प्रधानमंत्री के सामने रखीं तीन सख्त शर्तें
देश के उन मासूम छात्रों की आवाज बनते हुए Rahul Gandhi इस वक्त सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिन्हें न्याय मांगने पर 20 जुलाई को सड़कों पर बेरहमी से पीटा गया था। लाठीचार्ज की इस घटना के बाद Rahul Gandhi ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने तीन बेहद सख्त शर्तें रख दी हैं। उनकी पहली मांग है कि पेपर लीक के सबसे बड़े जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से हटाया जाए। दूसरी मांग है कि निर्दोष छात्रों पर बर्बरता करने वाले पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो, और तीसरी शर्त यह है कि खुद प्रधानमंत्री इस महाघोटाले पर पूरे देश से हाथ जोड़कर माफी मांगें।
पुलिसकर्मी ने कान में कही दिल की बात
‘छात्रों की गूंज’ संवाद कार्यक्रम का आयोजन कर रहे Rahul Gandhi छात्रों पर हुए अत्याचार से बेहद गुस्से में थे। इसी गुस्से की धधक 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान देखने को मिली, जब पुलिस ने Rahul Gandhi को जबरन घसीटकर वहां से हटा दिया। इस दौरान हुए एक चौंकाने वाले वाकये का Rahul Gandhi ने खुद खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जो पुलिसवाले उन्हें हटा रहे थे, उन्होंने कान में दबी आवाज में कहा, “राहुल जी, प्लीज इस सरकार को हटाइए।” यह बयान साबित करता है कि अब खुद सरकारी सिस्टम के लोग भी इस तानाशाही से छुटकारा पाना चाहते हैं।
आधी रात को गांधी स्मृति वन पहुंचे दिग्गज
सरकार के दमन और तानाशाही के खिलाफ 23 जुलाई की रात एक बार फिर पूरा विपक्ष एकजुट नजर आया। Rahul Gandhi और प्रियंका गांधी समेत इंडिया गठबंधन के तमाम दिग्गज नेता एक ही बस में सवार होकर आधी रात को सीधे गांधी स्मृति वन पहुंचे। वहां पहुंचकर Rahul Gandhi ने उन मासूम और होनहार छात्रों को भावुक श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने नीट पेपर लीक घोटाले के बाद सिस्टम की नाकामी के चलते अपनी जान गंवा दी थी।
अधिकारियों के तबादले से नहीं बचेगा तंत्र
श्रद्धांजलि देने के बाद Rahul Gandhi ने देश के युवाओं को संदेश दिया कि भारत के छात्र खुद को अकेला न समझें, पूरा विपक्ष उनके हक की लड़ाई मजबूती से लड़ेगा। दूसरी तरफ, बुरी तरह डरी हुई मोदी सरकार अब जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए सिर्फ अधिकारियों पर गाज गिरा रही है। सरकार ने उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को हटाकर नरेश पाल गंगवार को नया सचिव तो बना दिया, लेकिन इस महाघोटाले के मुख्य जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अब भी अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं।
आर-पार की जंग पहुंचेगी आखिरी मुकाम तक
महज कुछ प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला करके मोदी सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती है। जिस तरह से Rahul Gandhi ने इस सरकार के अहंकार को झुका दिया है, उससे स्पष्ट है कि विपक्ष अब शांत बैठने वाला नहीं है। छात्रों को न्याय दिलाने और शिक्षा तंत्र की कमियों को उजागर करने की यह आर-पार की जंग अब अपने आखिरी मुकाम तक पहुंचकर ही दम लेगी।
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