Modi Government

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Modi Government की आर्थिक नीतियों और ईंधन प्रबंधन पर आज देश में चौतरफा सवाल उठ रहे हैं। टाटा ग्रुप की एयरलाइन एअर इंडिया ने घोषणा की है कि वह हर हफ्ते अपनी करीब 800 घरेलू उड़ानों में भारी कटौती करने जा रही है। यह बड़ा बदलाव जून से अगस्त 2026 के बीच लागू रहेगा।

कंपनी का स्पष्ट कहना है कि यह सख्त फैसला जेट फ्यूल यानी हवाई ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण विवश होकर लिया गया है। वहीं दूसरी ओर, एक न्यूज़ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो भी आने वाले दिनों में अपनी घरेलू उड़ानों में 5% से 7% तक की कटौती कर सकती है, जिससे विमानन क्षेत्र में संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

विमानन क्षेत्र पर संकट और उड़ानों का गणित

एअर इंडिया वर्तमान में हर हफ्ते करीब 4400 उड़ानें ऑपरेट कर रही है, जिनमें करीब 3600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि विमानन ईंधन के मोर्चे पर विफल रही Modi Government के राज में कंपनी ने सीधे-सीधे 22% तक घरेलू फ्लाइट्स को बंद करने का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया है। अब इस पूरे मामले को लेकर Modi Government पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर देश के एविएशन सेक्टर को इस हाल में क्यों छोड़ दिया गया है। आम यात्रियों के लिए अब सफर करना न सिर्फ महंगा होगा, बल्कि विकल्पों में भी भारी कमी आ जाएगी।

दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा विरोधाभास

कुछ दिनों पहले तक तो Modi Government के बड़े-बड़े नुमाइंदे और मंत्री सीना ठोककर सार्वजनिक मंचों से कह रहे थे कि देश में तेल की कोई समस्या नहीं है और सब कुछ पूरी तरह से कंट्रोल में है। लेकिन जनता पूछ रही है कि अगर सब कुछ नियंत्रण में था, तो फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि इसी मई के महीने में ही 4 बार में पेट्रोल और डीजल के दाम 7 रुपये से ज्यादा बढ़ा दिए गए? इस मोर्चे पर नाकाम रही Modi Government ने आम जनता की जेब पर एक और आर्थिक बोझ डालते हुए सीएनजी गैस के दाम भी 6 रुपये तक बढ़ा दिए हैं, जिससे मालभाड़ा और रोजमर्रा की जरूरतें और महंगी हो गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान और घरेलू नीतियां

हैरानी की बात तो यह है कि भारत में यह सब तब हो रहा है जब पूरे विश्व में क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल के दाम लगातार घट रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बुरी तरह औंधे मुंह गिर गई हैं। वैश्विक बाजार के इन सुलभ आंकड़ों के बाद भी Modi Government देश के भीतर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित कर जनता को राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है, जिससे हर वर्ग में भारी आक्रोश पनप रहा है।

वैश्विक गिरावट का लाभ देने में विफल प्रशासन

आंकड़े गवाह हैं कि 25 मई को ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में 6 फीसदी तक की भारी गिरावट देखी गई थी। ब्रेंट क्रूड गिरकर 100 डॉलर से नीचे, यानी करीब 97.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है और अमेरिकी क्रूड भी करीब 90 डॉलर के आसपास गोता खा रहा है। यानी पूरी दुनिया में कच्चा तेल पिछले दो हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और पिछले हफ्ते भी इसमें 5 से 8 परसेंट की बड़ी गिरावट देखी गई थी।

कायदे से भारत की आम जनता को इस अंतरराष्ट्रीय गिरावट का सीधा फायदा मिलना चाहिए था और पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने चाहिए थे, लेकिन Modi Government के तहत यहाँ पूरी कहानी ही उल्टी चल रही है। भारत में दाम घटाने के बजाय Modi Government जनता की जेब पर लगातार डाका डाल रही है। इसका प्रमाण यह है कि 25 मई को जब दुनिया में तेल सस्ता हो रहा था, तब भारत में फिर से पेट्रोल पर 2 रुपये 87 पैसे और डीजल पर 2 रुपये 80 पैसे बढ़ा दिए गए थे।

‘अच्छे दिन’ और ‘अमृतकाल’ के दावों पर सवाल

ऐसे में देश के नागरिकों के मन में यह बड़ा सवाल उठता है कि आखिर Modi Government कर क्या रही है और क्यों देश की आर्थिक स्थिति को संभाल नहीं पा रही है? जब दुनिया भर में क्रूड ऑयल के दाम घट रहे हैं, तो भारत में घरेलू फ्लाइट्स को बंद करने की नौबत क्यों आ गई और क्यों हवाई ईंधन को इतना अप्रत्याशित रूप से महंगा कर दिया गया है?

आज उन समर्थकों पर भी सवाल उठ रहे हैं जो हर बात पर प्रशासन की जय-जयकार करते थे; वे आज Modi Government से यह सवाल क्यों नहीं पूछ रहे कि देश में यह अंधेरगर्दी क्यों मची है? क्यों हर दूसरे दिन महंगाई का चाबुक जनता पर चलाया जा रहा है और Modi Government देश की जनता को किस बात की सजा दे रही है? जनता आज पूछ रही है कि क्या यही हैं वो ‘अच्छे दिन’ और क्या यही है वो ‘अमृतकाल’ जिसका ढिंढोरा पीटा जाता था, जहाँ कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद जनता को दाम बढ़ाकर इस कदर प्रताड़ित किया जा रहा है।


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