Crude Oil Price

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Crude Oil: आज पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। लेकिन अब एक ऐसी खबर आई है, जो महंगाई से जूझ रही जनता को कुछ राहत दे सकती है. बस अगर मोदी सरकार चाहे तो। दरअसल, कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल (Crude Oil) का भाव काफी गिर गया है। पहले ये 100-120 डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन अब ये वापस 82 डॉलर के आसपास आ गया है। यानी वो बहाना जो महंगाई बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया था, वो अब नहीं रहा।

तो सवाल ये है कि अब सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम घटाएगी या फिर जनता को ऐसे ही लूटती रहेगी? मई में हम सबने देखा कि महंगाई कैसे बढ़ाई गई। खासकर पेट्रोल और डीजल के दाम किस तरह बढ़ाए गए। सिर्फ 11 दिन में मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़ाए। 15 मई को ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई, 19 मई को ₹0.90 प्रति लीटर और बढ़ा दिए। 23 मई को पेट्रोल में ₹0.87 और डीजल में ₹0.91 बढ़े। 25 मई को फिर पेट्रोल में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर का झटका लगा। कुल मिलाकर 8 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए मात्र 11 दिनों में।

आम आदमी की जेब पर पड़ा असर (Crude Oil)

दिल्ली में पेट्रोल 100 के पार पहुंच गया। आम आदमी की जेब पर सीधा बोझ पड़ा। जबकि इसी समय दूसरे देश अपनी जनता को राहत दे रहे थे। यहां तक कि पाकिस्तान भी बार-बार पेट्रोल-डीजल के दाम घटा रहा था, ताकि जनता पर महंगाई का बोझ न बढ़े। जब क्रूड थोड़ा सस्ता हुआ तो दुनिया के कई देशों ने अपनी जनता को राहत दी। पाकिस्तान ने दाम घटाए, केन्या ने कटौती की, ब्राजील, कनाडा, फिनलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कई देशों ने या तो टैक्स कम कर दिया या सीधे पेट्रोल-डीजल सस्ता कर दिया। जनता को सांस लेने का मौका दिया।

भारत में नहीं कम हुए दाम

लेकिन भारत में महंगाई बढ़ती रही। सरकार ने राहत की बजाय बोझ बढ़ाया।और सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, एलपीजी सिलेंडर के दाम भी लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। खासकर कमर्शियल सिलेंडर और 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर, जो छोटे होटल, ढाबे, प्रवासी मजदूर और छात्र इस्तेमाल करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 महीनों में कमर्शियल सिलेंडर के दाम 1572 रुपये बढ़ चुके हैं। 1 जनवरी को ₹111 बढ़े, 1 फरवरी को ₹50, 1 मार्च को ₹31, 7 मार्च को ₹115, 1 अप्रैल को ₹218, 1 मई को ₹993 और 1 जून को ₹53.50 बढ़ाए गए।

वहीं 5 किलो वाला छोटू सिलेंडर भी एक महीने के भीतर 272 रुपये महंगा हो गया। सिर्फ मई में ₹261 बढ़े थे और जून में ₹11 और बढ़ा दिया गया। जो गरीब मजदूर दिल्ली-मुंबई में किराए के कमरे में रहकर खाना बनाते हैं, उनके लिए ये कितना बड़ा झटका है, आप खुद समझ सकते हैं।

बहाना देती रही सरकार

सवाल करने पर मोदी सरकार बहाना देती रही कि कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम बढ़ गए हैं, इसलिए महंगाई बढ़ाई जा रही है। लेकिन अब तो कच्चे तेल के दाम घट गए हैं। तो अब क्या बहाना है सरकार के पास महंगाई कायम रखने का?जान लीजिए कि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अगर कच्चा तेल (Crude Oil) गिरकर 82 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है, तो इससे भारत के आयात बिल में कमी आएगी। इससे रुपये पर दबाव भी कम होगा। फिर भी सरकार पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम क्यों नहीं घटा रही? लग रहा है कि ऐसा करने का मोदी सरकार को कोई इरादा नहीं है।


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