Wheat Stock of India: देश के सरकारी भंडारों में गेहूं का स्टॉक पिछले 16 सालों के न्यूनतम स्तर पर है. दरअसल, सरकारी भंडारों में हर वक्त गेहूं का तीन महीने का स्टॉक यानी 138 टन गेहूं होना चाहिए. लेकिन इस बार खरीद सत्र शुरु होने से पहले यह मात्र 75 लाख टन था. वहीं इसके पहले 2023 में यह 84 लाख टन था, जबकि 2022 और 2021 में यह स्टॉक क्रमशः 180 लाख टन और 280 लाख टन था. बता दें कि इसके पहले 2007-8 में गेहूं का स्टॉक 58 लाख टन रहा था. सरकार ने आटे के बढ़ते दामों पर नियंत्रण करने के लिए एक साल में कई बार गेहूं ओपन मार्केट में बेचा, जिसकी वजह से सरकारी स्टॉक में कमी आई है.
तत्काल गेहूं के आयात की जरूरत
गेहूं के स्टॉक में कमी को देखते हुए सरकार को तत्काल गेहूं का आयात करना पड़ सकता है. हालांकि, सरकार ने अभी तक कुल 264 लाख टन गेहूं खरीद लिया है, लेकिन सरकारी लक्ष्य 372 लाख टन का है. इसके लिए सरकार ने खरीद का समय भी 22 जून तक बढ़ा दिया है. गौरतलब है कि भारत ने आखिरी बार यूक्रेन और ऑस्ट्रेलिया से 2017-18 में करीब 15 लाख गेहूं आयात किया था. जबकि 2021-22 में 80 लाख टन, 2022-23 में 55 लाख टन और 2023-24 में 5 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था.
बढ़ेगी आटे की कीमत
देश में गेहूं के स्टॉक (Wheat Stock of India) में कमी की वजह से उसकी कीमतें भी बढ़ रही हैं. पिछले 15 दिनों में ही गेहूं 7 प्रतिशत महंगा हुआ है और आने वाले अगले 15 दिनों में गेहूं की कीमत में और 7 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है. अगले 15 दिनों में गेहूं के दाम 3 रूपए और बढ़ सकते हैं. दरअसल, इस बार गेहूं के फसल चक्र के दौरान कोहरे और हवा की वजह से इसकी प्रति एकड़ उत्पादकता 5 क्विंटल तक कम हो गई, जिसकी वजह से आटे के बढ़ते दामों को रोकने के लिए सरकार ने व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट लगा दी थी. ऐसा करने से अब व्यापारियों के पास भी गेहूं नहीं है, इसलिए वे और ज्यादा गेहूं खरीद रहे हैं.
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