PM Modi
PM Modi के लिए अब वक्त, हालात और देश का जज्बात काफी बदल चुका है। अब वह दौर बीत चुका है जब सिर्फ भाषणों और जुमलों से लोगों को प्रभावित किया जा सकता था। आज जनता सीधे सवाल पूछ रही है और नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन जैसे मौके पर भी लोग तीखे तंज कस रहे हैं। स्थिति यह हो गई कि देश-दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स के कमेंट सेक्शन तक बंद करने पड़ गए।
BBC हिंदी की पोस्ट पर जनता की तीखी प्रतिक्रिया
यह पूरा मामला BBC हिंदी के एक सोशल मीडिया सर्वे से जुड़ा है। BBC ने अपने इंस्टाग्राम और यूट्यूब हैंडल्स पर PM Modi के जन्मदिन को लेकर एक साधारण सा सवाल पूछा था कि लोग उन्हें क्या तोहफा देना चाहते हैं। जैसे ही लोगों के जवाब आने शुरू हुए, कमेंट्स की बाढ़ आ गई। स्थिति नियंत्रण से बाहर होते देख BBC को अपना इंस्टाग्राम कमेंट सेक्शन बंद करना पड़ा और भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील जारी करनी पड़ी।
गुस्से के पीछे की जमीनी वजहें
जनता के इस आक्रोश के पीछे कई ठोस वजहें साफ नजर आती हैं। लगातार होते पेपर लीक, युवाओं का अनिश्चित भविष्य, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से लोग परेशान हैं। इसके अलावा अपने 10 साल के कार्यकाल में PM Modi द्वारा एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने और खुद को ‘नॉन-बायोलॉजिकल’ बताने जैसी बातों को लेकर भी जनता के एक बड़े वर्ग में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है।
यूट्यूब पर यूजर्स ने दिए अनोखे तोहफे
भले ही इंस्टाग्राम के कमेंट्स बंद कर दिए गए हों, लेकिन यूट्यूब पर लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। यूजर्स ने PM Modi को तोहफे के तौर पर ‘रेजिग्नेशन लेटर’ देने की बात कही, तो किसी ने ‘इस्तीफे का गिफ्ट’ माँगा। कई यूजर्स ने इस दिन को ‘राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’, ‘सैड फार्मर डे’ और ‘पेपर लीक डे’ बताकर सरकार की नीतियों पर जमकर तंज कसा।
वादों और दावों पर उठे गंभीर सवाल
कमेंट्स में लोगों ने पुराने दावों को याद दिलाते हुए तीखे सवाल पूछे। किसी ने PM Modi को पढ़ाई करने के लिए ‘टाइम मशीन’ देने का ताना मारा, तो किसी ने उनसे एक सीधी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की मांग की। 15 लाख रुपये और सालाना 2 करोड़ रोजगार जैसे पुराने दावों को लेकर भी यूजर्स ने सोशल मीडिया पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
ब्रांडिंग से आगे जमीनी जवाबदेही की मांग
इस पूरी घटना से स्पष्ट है कि जनता अब सिर्फ ब्रांडिंग और विज्ञापनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। PM Modi और उनकी सरकार को समझना होगा कि जनता अब जमीनी स्तर पर ठोस काम और जवाब चाहती है। यदि समय रहते इन बुनियादी समस्याओं और जन-आक्रोश पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह नाराजगी आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकती है।
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