PM Modi's Birthday
PM Modi’s Birthday: अगर आपको लग रहा है कि मोदी जी के जन्मदिन का ड्रामा बस कल भर का ही था तो गलत हैं आप। ये जन्मदिन सिर्फ एक दिन का नहीं है। ये पूरा एक महीना चलने वाला महाउत्सव बन गया है। दिल्ली में राज्य सरकार और बीजेपी ने “सेवा संकल्प अभियान जन सेवा ही प्रभु सेवा है” नाम से कार्यक्रम शुरू किया है। ये 17 सितंबर से 18 अक्टूबर तक चलेगा। यानी पूरे एक महीने।
दीये जलाने (PM Modi’s Birthday) से लेकर रक्तदान, उद्घाटन, शिलान्यास, योजनाओं का प्रचार सब कुछ इसमें शामिल है। एक पूरा बुकलेट भी छपवाया गया है। हरियाणा सरकार ने भी पीछे नहीं रहना चाहा। वहां हर जिलाधिकारी को इस अभियान के लिए 10 लाख रुपये आवंटित कर दिए गए हैं। मतलब पूरे एक महीने तक लाखों करोड़ों रुपए फूंककर ये ड्रामा किया जाएगा।
हर साल कोई न कोई होता है सेलीब्रेशन (PM Modi’s Birthday)
हालांकि ये इसी साल की मुसीबत नहीं है। पहले भी मोदी सरकार इस तरह के काम करती रही है और जनता के लाखों करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए हैं। उदाहरण के लिए पिछले साल अक्टूबर 2025 में गुजरात सरकार ने “विकास सप्ताह” मनाया था। ये नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के 24 साल पूरे होने के मौके पर था। सिर्फ 9 दिनों के इस कार्यक्रम पर 14.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ये जानकारी कांग्रेस विधायक जिग्नेश मेवाणी के सवाल के जवाब में विधानसभा में आई।
उससे एक साल पहले 2024 में मोदी के सार्वजनिक जीवन के 23 साल पूरे होने पर सिर्फ विज्ञापनों पर 8.81 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, सोशल मीडिया हर जगह पैसे फेंके गए थे। और सिर्फ जन्मदिन या सीएम वाले साल नहीं। मोदी सरकार के कार्यकाल में हर मौके पर ऐसे अभियान चलते रहते हैं। जीएसटी दिवस, 9 साल सेवा सुशासन, मन की बात के 100वें एपिसोड, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला सब पर विज्ञापनों की बौछार होती है।
11 साल में मोदी सरकार ने बर्बाद किए 6 हजार करोड़
आंकड़े बताते हैं कि केंद्र सरकार ने 11 साल में प्रचार पर करीब 6 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए। तो वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने 8 साल में 6,812 करोड़ रुपये झोंक दिए। उत्तराखंड ने 5 साल में हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कर दिए। गुजरात का सूचना विभाग अकेले 2025 में विज्ञापनों पर 108.80 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। यानी रोजाना औसतन करीब 30 लाख रुपये।
क्या बताती हैं ये घटनाएं?
अब सवाल ये है कि जब देश में महंगाई आसमान छू रही है, बेरोजगारी चरम पर है, गरीब आदमी रोटी के लिए तरस रहा है, तब ये करोड़ों रुपये जन्मदिन (PM Modi’s Birthday) पर क्यों फूंके जा रहे हैं? वो भी एक दिन का जन्मदिन नहीं, पूरे महीने का उत्सव मनाया जा रहा है। दीये जलाने का आदेश, स्कूलों में प्रधानाचार्यों को बुलाना, बच्चों से घर पर दीये जलवाना, फोटो सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप में डालना ये सब क्या है? किसी नेता का जन्मदिन इतने बड़े पैमाने पर मनाना, सरकारी पैसे से मनाना, क्या ये सामान्य बात है? या फिर कोई खुद (PM Modi’s Birthday) को भगवान समझने लगा है?
हिंदू धर्म में दीये भगवान के लिए जलाए जाते हैं। किसी इंसान के लिए महीने भर दीये जलाने का अभियान चलाना ये क्या संदेश देता है? जब आम आदमी पेट्रोल डीजल, दूध, चीनी, प्याज के दाम से परेशान है, जब युवा नौकरी के लिए भटक रहे हैं, जब किसान कर्ज में डूबे हैं, तब सरकार का ध्यान कहां है? प्रचार पर। विज्ञापन पर। जन्मदिन के उत्सव पर। गुजरात में 9 दिन पर 14 करोड़। दिल्ली में महीने भर का अभियान। हरियाणा में हर जिले को 10 लाख। ये पैसा कहां से आ रहा है? जनता की जेब से। टैक्स से। मोदी जी अक्सर कहते हैं कि वो सिर्फ सेवा करते हैं। लेकिन सेवा के नाम पर इतना बड़ा प्रचार तंत्र खड़ा करना, खुद के जन्मदिन को राष्ट्रीय उत्सव बनाना ये सेवा है या खुद को महान साबित करने की कोशिश?
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