UPI पेमेंट पर एक्स्ट्रा चार्ज लेगी मोदी सरकार
Extra Charge on UPI Payment: अब यूपीआई से पेमेंट करने पर भी वसूली का खेल शुरू होने वाला है। मोदी सरकार लंबे समय से जनता की जेब काटने का नया तरीका ढूंढ रही थी, जो अब उसे मिल गया है। दरअसल हाल ही में फाइनेंस मिनिस्ट्री ने नोटिफिकेशन जारी किया है। दो हजार रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे। लेकिन दो हजार रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने का रास्ता खुल गया है। इसे एमडीआर कहते हैं।
UPI पेमेंट पर इतना लगेगा चार्ज
अनुमान है कि 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक चार्ज हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो फिर अगर आपने पांच हजार रुपये की खरीदारी की तो करीब पंद्रह से पच्चीस रुपये का चार्ज लग सकता है। दस हजार रुपये पर तीस से पचास रुपये। ये चार्ज अभी मर्चेंट पर लगेगा, लेकिन अंत में दुकानदार या कंपनी इसे ग्राहक पर ही डाल देगी। यानी आपकी जेब से ही निकलेगा।
पहले यूपीआई पूरी तरह फ्री था। डिजिटल इंडिया का झंडा लहराने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया गया। अब जब करोड़ों लोग इस्तेमाल करने लगे तो वसूली का प्लान आ गया। मोदी सरकार का फंडा साफ है। जितना हो सके जनता से पैसे निकालो और अपने मित्रों की जेब भरो।
करोड़ों लोग होंगे प्रभावित
आप सोचिए, रोजाना करोड़ों छोटे बड़े ट्रांजैक्शन होते हैं। अगर बड़े ट्रांजैक्शन (UPI) पर भी चार्ज लगने लगा तो मिडिल क्लास और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। किराना स्टोर, छोटे दुकानदार, टैक्सी वाले, सभी पर बोझ बढ़ेगा। आखिर में आम आदमी को ही ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
जीएसटी से भी होती है वसूली
हालांकि ये इकलौता तरीका नहीं है मोदी सरकार की वसूली का। मोदी सरकार और भी कई तरीकों से जनता से वसूली कर रही है। सरकार का सबसे बड़ा हथियार है जीएसटी। कॉपी पेन से लेकर पॉपकॉर्न तक, दही से लेकर दवाई तक, हर चीज पर जीएसटी लग रहा है। माचिस की डिब्बी, मग, कॉटन शर्ट, आटा, पढ़ाई का सामान, सब पर टैक्स लग रहा है। सांस लेने को छोड़ दो तो बाकी हर चीज पर टैक्स है। खेती किसानी से जुड़े सामानों पर भी जीएसटी लगा दिया गया है। आजाद भारत में पहली बार ऐसा हुआ। किसानों के साथ इतना अन्याय पहले कभी नहीं देखा गया।
आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी का बड़ा हिस्सा आम आदमी और मिडिल क्लास से आता है। गरीब और निचली आय वाली आबादी ज्यादा योगदान देती है, जबकि अमीर कम। वन नेशन वन टैक्स की बात तो अच्छी लगती है, लेकिन असल में ये अमीरों के लिए फायदेमंद और गरीबों के लिए बोझ साबित हो रहा है।
महंगाई भी एक हथियार
महंगाई तो और भी बड़ा हथियार है। पेट्रोल डीजल, सीएनजी, एलपीजी, दूध, चीनी, प्याज, सब आसमान छू रहे हैं। महंगाई बढ़ाकर सरकार को ज्यादा टैक्स मिलता है। जीएसटी कलेक्शन भी महंगाई के साथ बढ़ता है। यानी महंगाई से भी वसूली हो रही है। ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी, रोड टैक्स, टोल प्लाजा, सब जगह से पैसे निकल रहे हैं। छोटे मोटे सामान पर भी अप्रत्यक्ष टैक्स लगाए जा रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कभी कहा था कि जीएसटी लोगों को राहत देने के लिए है, लूटने के लिए नहीं। लेकिन मोदी सरकार ने इसे उल्टा कर दिया। अब हर महीने आम आदमी की कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स और महंगाई में चला जाता है। बचत नाम की चीज खत्म हो गई है। मोदी सरकार का दावा है कि देश आगे बढ़ रहा है, लेकिन आम आदमी की जेब खाली हो रही है। UPI पर चार्ज का रास्ता खोलना, जीएसटी का बोझ, महंगाई, ये सब एक ही कहानी बता रहे हैं। मोदी सरकार सिर्फ और सिर्फ जनता की जेब काटने की प्लानिंग करती रहती है। ये सब देखकर सवाल उठता है कि आखिर विकास किसके लिए हो रहा है। आम आदमी के लिए या कुछ चुनिंदा लोगों की तिजोरी भरने के लिए।
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