PM Modi and Giorgia Meloni

PM Modi and Giorgia Meloni

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PM Modi should learn from Giorgia Meloni: आज बात करते हैं एक छोटे से देश की महिला प्रधानमंत्री की, जिसने दिखा दिया कि राष्ट्र का सम्मान कितना बड़ा होता है। इटली की जॉर्जिया मेलोनी। उनकी आबादी सिर्फ छह करोड़ है, लेकिन जब बात अपने देश और खुद के सम्मान की आई, तो उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।

ट्रंप ने दिया विवादित बयान

दरअसल हुआ ये कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर दिया कि मेलोनी (Giorgia Meloni) उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए भीख मांग रही थीं। ट्रंप ने शेखी बघारी, जैसे वो किसी को एहसान दे रहे हों। आमतौर पर बड़े देशों के नेता ऐसे बयान पर चुप रह जाते हैं या हल्का फुल्का जवाब देकर निकल लेते हैं। लेकिन मेलोनी (Giorgia Meloni) ने वैसा नहीं किया। उन्होंने सीधे जवाब दिया।

सार्वजनिक रूप से कहा, “न मैं भीख मांगती हूं, न मेरा देश इटली भीख मांगता है। ये बिल्कुल गलत और मनगढ़ंत बात है।” उनका स्वर साफ था, आंखों में गुस्सा था और इटली का गौरव झलक रहा था। सिर्फ इतना ही नहीं, इटली के विदेश मंत्री ने अपना अमेरिका दौरा फौरन रद्द कर दिया। ऐसा करके इटली ने साफ संदेश दिया कि भले हम छोटे देश हैं, लेकिन अपने सम्मान के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इसे कहते हैं असली लीडरशिप (Giorgia Meloni)

ये है असली लीडरशिप। छोटा देश, लेकिन मजबूत इरादा। मेलोनी (Giorgia Meloni) ने साबित कर दिया कि राष्ट्राध्यक्ष की सबसे बड़ी ताकत उसकी रीढ़ की हड्डी होती है। जब देश का अपमान हो, तो मुंह खोलना पड़ता है, चुप रहकर नहीं बैठना पड़ता।

भारत सरकार ऐसा नहीं करती

अब इधर हमारे देश की तरफ देखिए। 145 करोड़ की आबादी, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जब ट्रंप से मिलते हैं तो क्या नजारा होता है? पर्ची पढ़कर “एक्सीलेंसी” शब्द छह बार दोहराते नजर आते हैं। मुस्कुराते रहते हैं, हाथ मिलाते हैं, और देश के सम्मान वाली कोई बात मुंह से नहीं निकलती।

कुछ समय पहले अमेरिका ने तीन भारतीय नाविकों की हत्या कर दी थी। ये साधारण मजदूर थे, जो समुद्र पर काम कर रहे थे, अपना पेट पाल रहे थे। उनकी मौत क्रूर तरीके से हुई। पूरा देश गुस्से में था। लोग उम्मीद कर रहे थे कि हमारी सरकार इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी। लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा। प्रधानमंत्री ट्रंप से मिले, मिठी मिठी बातें की, उनकी तारीफों के पुल बांधे और बस हो गया काम।

इस बीच ट्रंप से जब नाविकों की हत्या पर सवाल किया गया तो ट्रंप ने बस इतना कहकर सवाल को टाल दिया कि ये तो खतरनाक पेशा है। कोई खेद नहीं, कोई माफी नहीं, कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं। और हमारे प्रधानमंत्री? वो तो एकदम चुप रहे। मुंह से एक शब्द नहीं निकला। एक बार भी उनकी हिम्मत नहीं हुई ये कहने की कि जो हुआ गलत हुआ। अमेरिका ने हमारे नाविकों को मारकर अच्छा नहीं किया। हम चुप नहीं बैठेंगे अगर इस तरह की हरकत दोहराई गई। पर नहीं, मोदी जी ने ऐसा कुछ नहीं किया।

मोदी ने किया देश का अपमान

ये चुप्पी सिर्फ एक बैठक की नहीं है। ये पैटर्न है। जब भी अमेरिका या बड़े देशों के साथ कोई विवाद होता है, तो हमारी सरकार “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप”, “दोस्ती” और “रिश्तों” के नाम पर चुप रह जाती है। मेलोनी ने दिखाया कि दोस्ती अच्छी बात है, लेकिन उसमें भी अपनी गरिमा रखनी पड़ती है। दोस्ती का मतलब ये नहीं कि अपना सिर झुका दो और अपमान सह लो। आप सोचिए अगर मेलोनी जैसी हिम्मत यहां होती तो क्या होता? तीन नाविकों की मौत पर अमेरिका को साफ कह दिया जाता कि जवाब दो, वरना रिश्ते प्रभावित होंगे। विदेश मंत्री अमेरिका का दौरा रद्द कर देते। या कम से कम सार्वजनिक रूप से इतना तो कहते कि हम इसकी निंदा करते हैं और पूरी जांच चाहते हैं।

लेकिन नहीं। ऐसा कुछ नहीं किया गया मोदी सरकार की तरफ से। लोग कहते हैं कि बड़ी ताकत के सामने छोटे देश नहीं टिक पाते। लेकिन मेलोनी (Giorgia Meloni) ने ये मिथक तोड़ दिया। इटली अमेरिका का सहयोगी देश है, फिर भी जब अपमान हुआ तो उन्होंने जवाब दिया। अफसोस, मोदी सरकार ने ये हिम्मत कभी नहीं दिखाई।


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