Ethanol Minister's Truth
Ethanol Minister’s Truth: एक तरफ बेटे के मोह में पागल गडकरी इथेनॉल का प्रचार करते नहीं थक रहे हैं। बार बार कह रहे हैं कि इथेनॉल से बढ़िया कुछ भी नहीं है। यहां तक कह दिया है कि इथेनॉल के खिलाफ एक लॉबी के लोग झूठा प्रचार कर रहे हैं। असल में एथेनॉल से कोई नुकसान नहीं हो रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ तेल कंपनी बीपीसीएल के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी कह रहे हैं कि इथेनॉल से गाड़ियों का माइलेज 30 फीसदी कम होता है। अब जब अनुराग सरावगी का बयान वायरल हुआ तो एएनआई से वो वीडियो डिलीट करवा दिया गया।
क्या इन सवालों का जवाब देंगे गडकरी?
अब सवाल Ethanol के आका गडकरी से है। ये वीडियो किस लॉबी ने डिलीट कराया होगा और भला क्यों? किसे इतनी दिक्कत हो रही है इथेनॉल की सच बाहर आने से? और हां इथेनॉल की सच सिर्फ इतना ही नहीं है। ये इथेनॉल आपको हवा साफ करने का इलाज बोलकर बेचा जा रहा है। गडकरी इसे नेचुरल बोलकर प्रोमोट कर रहे हैं, लेकिन असल में ये हवा में जहर घोल रहा है। इसका खुलासा भी हाल ही में एक यूट्यूबर ने अपनी डॉक्यूमेंट्री में किया है। ये डॉक्यूमेंट्री सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई।
वायरल हुई डॉक्यूमेंट्री (Ethanol)
ये थी मेघालय के बर्नीहाट गांव की, जो 2024 से मोस्ट पॉल्यूटेड शहरों में शामिल है। यहां एक लाख लोग भी नहीं रहते हैं, फिर भी यहां दिल्ली, गुड़गांव से भी ज्यादा प्रदूषण है। क्यों? Ethanol की वजह से। पिछले दिनों सार्थक गोस्वामी नामक एक यूट्यूबर इस गांव में पहुंचे थे और एक डॉक्यूमेंट्री शूट की। जिससे हमें पता चला कि कितने बुरे हालात हैं इस कस्बे के। यहां इथेनॉल के बड़े बड़े प्लांट लगे हुए हैं और पूरे क्षेत्र में काला धुआं तैर रहा है। सारे पेड़ पौधे वनस्पतियां सब काले पड़ चुके हैं। लोग अपने खाने की सब्जियां चार चार बार धोते हैं फिर भी कालिख नहीं निकल पाती।
बर्नीहाट में हो रहा पर्यावरण बर्बाद
बर्नीहाट की सारी खूबसूरती इस प्रदूषण के तले दब गई है। वहां का पर्यावरण बर्बाद हो रहा है। और ये सब करके हमें क्या मिल रहा है? Ethanol… जिससे हमारी गाड़ियां खराब हो रही हैं। गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं और गाड़ियों की माइलेज भी खराब हो रही है। मतलब ये इथेनॉल न प्रदूषण कम कर रहा है और न ही गाड़ियों के लिए अच्छा है। उलटा ये उसी कीमत पर मिल रहा है, जिस कीमत पर पेट्रोल मिलता है। फिर क्या फायदा हो रहा है जनता को? फायदा हो रहा है तो सिर्फ गडकरी के बेटों का। जिनकी कंपनियां इथेनॉल बनाकर करोड़ों अरबों रुपए छाप रही हैं।
गडकरी के बेटे बन रहे अरबपति
गडकरी के बेटे निखिल और सारंग की कंपनियां Ethanol प्रोडक्शन में लगी हैं। पुर्ती ग्रुप जो गडकरी ने 1995 में शुरू किया था अब उनके बेटों के हाथ में है। निखिल सीआईएएन एग्रो इंडस्ट्रीज का एमडी है तो सारंग मानस एग्रो का डायरेक्टर। सीआईएएन एग्रो इंडस्ट्रीज और मानस एग्रो दोनों ही कंपनियां एथेनॉल बनाती हैं। निखिल गडकरी की सीआईएएन एग्रो इंडस्ट्रीज का रेवेन्यू 2024 में 18 करोड़ था जो जून 2025 में बढ़कर 723 करोड़ हो गया। इस कंपनी के शेयर की कीमत जनवरी 2025 में 37 रुपये थी जो बाद में बढ़कर 668 रुपये हो गई है। यानी 2184 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
दूसरे बेटे सारंग मानस एग्रो चलाते हैं जो अनलिस्टेड है लेकिन वो भी इथेनॉल बनाती है। मानस का रेवेन्यू 2021 में 5990 करोड़ था जो 2024 में 9591 करोड़ हो गया। कुल मिलाकर Ethanol का बिजनेस करके गडकरी के दोनों बेटों ने करोड़ों रुपये छापे और आज भी छाप ही रहे हैं। नुकसान उठा रही है आम जनता।
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