Modi Government
Modi Government के नए नियमों और बयानों ने देश के आम नागरिकों के सामने पहचान का एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सुबह सोकर उठिए और पता चले कि आप इस देश के नागरिक ही नहीं हैं तो चौंकिए मत। जिस पासपोर्ट को बनवाने के लिए आपने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, पुलिस वेरिफिकेशन कराया और खानदान भर के कागज दिखाए, अब उसे लेकर Modi Government कही जा रही है कि बाबू, वो तो बस विदेश घूमने का एक टिकट है, नागरिकता का सबूत नहीं है।
जी हां, देश गजब तरीके से बदल रहा है, बल्कि यूं कहें कि पीछे जा रहा है। जो चीजें कल तक आपकी पहचान थीं, आज वो Modi Government की नजर में रद्दी के टुकड़े जैसी हो चुकी हैं।
पहचान और टैक्स के साधन, पर नागरिकता से दूरी
ज़रा सोचिए, आधार कार्ड आपकी नागरिकता का प्रमाण नहीं है। पैन कार्ड से सिर्फ टैक्स वसूला जा सकता है, नागरिकता नहीं मिलेगी। वोटर आईडी कार्ड से आप सरकार तो चुन सकते हैं, लेकिन खुद को इस देश का बाशिंदा साबित नहीं कर सकते। और अब Modi Government का ताजा-ताजा शगूफा यह आया है कि देश का पासपोर्ट भी आपकी नागरिकता का अंतिम मुहर नहीं है।
तो भाई, अब क्या करें? क्या हिंदुस्तान का पासपोर्ट अब विदेशियों को भी बांटा जाने लगा है? अगर यह सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, तो इसे बनाने से पहले पुलिस हमारे घर चाय पीने और जांच-पड़ताल करने क्यों आती है? क्या वो सिर्फ यह देखने आती है कि हम सूटकेस पैक करना जानते हैं या नहीं? Modi Government की सरकारी एजेंसियों की इस अजीबोगरीब दलील ने पूरे देश को चकरा कर रख दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और भविष्य के सवाल
मामला सिर्फ सरकारी बयानों तक सीमित नहीं है। पिछले साल 12 अगस्त, 2025 को बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने भी साफ कह दिया था कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए होगा, नागरिकता के सबूत के तौर पर बिल्कुल नहीं। तो अब Modi Government को लेकर सबसे बड़ा और सीधा सवाल यह उठता है कि आखिर वो कौन सा जादुई कागज है, जिसे दिखाकर हम सीना ठोककर कह सकें कि हम भारतीय हैं?
राजनीतिक चश्मे से नागरिकता का पैमाना
जब हर सरकारी दस्तावेज लाइन से खारिज हो रहा है, तो क्या अब नागरिकता का नया प्रमाण पत्र भारतीय जनता पार्टी का सदस्यता कार्ड होगा? क्या अब देश का वैध नागरिक होने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की टोपी पहननी पड़ेगी? जी हां, Modi Government से सवाल है कि क्या अब संघ की सदस्यता या फिर बीजेपी की सदस्यता ही राष्ट्रियता का पैमाना होगा, और वैसे भी आरएसएस तो खुद एक रजिस्टर्ड संस्था नहीं है। तो क्या जो लोग बीजेपी या संघ के साथ नहीं खड़े हैं, उन्हें सीधे गैर-नागरिक घोषित कर दिया जाएगा? क्या अब सत्ताधारियों का चरणवंदन ही देशप्रेम का इकलौता सर्टिफिकेट बच गया है?
जनता पर एक और नई लाइन का संकट
दोस्तों, जनता अभी तक नोटबंदी, कोरोना काल में इलाज के लिए, रसोई गैस के लिए और पेट्रोल-डीजल लेने के लिए लगी लंबी-लंबी लाइनों को भूली नहीं है। और अब फिर से ऐसा लग रहा है कि Modi Government देश की जनता को एक बार फिर नए प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लाइनों में खड़ा करने का पूरा बंदोबस्त कर चुकी है।
आप अपनी जिंदगी भर की कमाई, पढ़ाई और वजूद को बचाने के लिए नए-नए दफ्तरों के चक्कर काटते रहिए और Modi Government नए नियम बनाती रहेगी। ऐसे में देखना यह है कि पहचान के इस नए संकट में देश की जनता कब तक चुप रहती है।
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