Women Reservation

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Congress Exposed Modi Government on Women Reservation: मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के नाम चिट्ठी लिखकर उन्हें झूठा दिलासा दिया है कि 2029 के चुनाव महिलाओं के लिए पूरे आरक्षण के साथ होंगे। लेकिन कांग्रेस ने इनके इस जुमले की पोल पहले ही खोल दी है। सोनिया गांधी ने ‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में मोदी सरकार की सारी चालाकी एक्सपोज कर दी है।

ये है पूरा मामला (Women Reservation)

अब क्या है पूरा मामला, इसे समझने के लिए आपको चलना पड़ेगा सितंबर 2023 में। दरअसल 2023 में मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ नाम का कानून लाया। इसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण (Women Reservation) देने की बात थी। लेकिन सरकार ने इसमें एक शर्त लगा दी कि पहले देश की नई जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा और उसके बाद ही महिला आरक्षण लागू होगा। तब कांग्रेस ने बार-बार कहा था कि आरक्षण बिना किसी शर्त के 2024 में ही लागू कर दो। महिलाएँ चुनाव लड़ें और सदन में आएँ।

कांग्रेस ने की थी पहले ही लागू करने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर सोनिया गांधी तक सबने यही मांग की थी। पर मोदी सरकार ने नहीं सुना। और अब 30 महीने बाद मोदी सरकार अपने ही बनाए कानून (Women Reservation) को बदलने जा रही है। 16 अप्रैल से विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। सरकार कह रही है कि महिला आरक्षण अब 2029 के चुनाव से लागू होगा और परिसीमन 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर जल्दी कर दिया जाएगा। लेकिन इसमें भी बहुत बड़ा झोल है।

क्या कहा सोनिया गांधी ने?

सोनिया गांधी ने ‘द हिंदू’ में लिखे एक लेख में मोदी सरकार के इस जुमले की पूरी कलई खोल दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि महिला आरक्षण (Women Reservation) मुद्दा नहीं है। वो तो सदन में पास हो चुका है। असल मुद्दा महिला आरक्षण का नहीं, परिसीमन का है। मोदी सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की साजिश छिपा रही है।

क्या है परिसीमन?

अब सवाल ये है कि परिसीमन आखिर है क्या? परिसीमन का मतलब है लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या तय करना और उनकी सीमाएँ फिर से खींचना। जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती है, वैसे-वैसे कुछ राज्यों को ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। ये काम जनगणना के आंकड़ों पर होता है। सोनिया गांधी ने लिखा कि परिसीमन कोई साधारण अंकगणित नहीं है। ये राजनीतिक फैसला है। इसे निष्पक्ष और समान होना चाहिए। छोटे राज्यों जिन्होंने परिवार नियंत्रण अच्छा किया उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए।

पुराने आंकड़ों से होगा ये नुकसान

लेकिन मोदी सरकार बिना नई जनगणना के सिर्फ 2011 के पुराने आंकड़ों पर परिसीमन करने जा रही है। और यही सबसे बड़ी समस्या है। 2011 की जनगणना 15 साल पुरानी हो गई। 2021 में जनगणना होनी थी वो 5 साल लेट हो गई। डिजिटल जनगणना के आंकड़े 2027 तक आएंगे। फिर बिना ताजा आंकड़ों के परिसीमन कैसे होगा?

इसके अलावा कई राज्यों में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चला जिसमें लाखों-करोड़ों वोटरों के नाम कट गए। तो आबादी का असली आंकड़ा भी बदल गया। फिर SC/ST सीटें कैसे तय होंगी? OBC महिलाओं को आरक्षण (Women Reservation) कैसे मिलेगा? इसीलिए कांग्रेस कह रही है कि मोदी सरकार जातिगत जनगणना से बचना चाहती है।

राहुल गांधी एक साल से जातिगत जनगणना की कर रहे बात

राहुल गांधी एक साल से कह रहे थे कि जातिगत जनगणना होकर रहेगी। लेकिन मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए। मोदी जी खुद कह चुके हैं कि अर्बन नक्सल की सोच वाले लोग जातिगत जनगणना चाहते हैं। और अब अचानक वो परिसीमन तेज कर रहे हैं ताकि जातिगत जनगणना की जरूरत ही न पड़े। कांग्रेस कहती रही है कि OBC महिलाओं के लिए भी आरक्षण का रास्ता खोलो। लेकिन सरकार शकुनी चाल चल रही है।

महिला आरक्षण (Women Reservation) के नाम पर परिसीमन कर दो और जातिगत जनगणना टाल दो। कांग्रेस का आरोप साफ है कि मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण की नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक साजिश की सोच रही है। वो महिला आरक्षण के पीछे छिपकर परिसीमन का खेल खेल रही है ताकि उत्तर भारत को ज्यादा सीटें मिलें और दक्षिण के राज्यों का प्रभाव कम हो जाए। साथ ही जातिगत जनगणना टालकर OBC आरक्षण पर भी पर्दा डाल दिया जाए। अब ये बात जनता को समझना है कि मोदी सरकार असल में महिलाओं को सशक्त बना रही है या सिर्फ वोट की राजनीति कर रही है।


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