Raghav Chadha

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Raghav Chadha is not Innocent: राघव चड्ढा को लेकर अगर आप भी इमोशनल हो रहे हैं. ये सोच रहे हैं कि हाय बिचारे के साथ बड़ा गलत हो गया… वो तो आम आदमी की आवाज उठा रहा था. तो जरा ठहरिए। कुछ अंदर की बात बताती हूँ आपको। ये जो फिल्मी कहानी गढ़ी गई है कि एक नेता आम जनता के मुद्दों की बात कर रहा था, इसलिए उसकी ही पार्टी उसके खिलाफ हो गई और उसे बाहर कर दिया. अब जनता का वो फेवरेट नेता अकेला पड़ गया है. उसे जनता के सपोर्ट की जरूरत है. ये सब कुछ एक बहुत शानदार पीआर गेम है। जिसके चक्कर में आज आप जैसे ही बहुत से लोग फंस चुके हैं।

Raghav Chadha बेचारा नहीं…

यहाँ इस गेम में बिचारा कोई नहीं है, न ही आम आदमी पार्टी और न ही राघव चड्ढा (Raghav Chadha) । दोनों ही अपने-अपने फायदे के लिए लड़ रहे हैं। राघव चड्ढा को 2024 में ही भनक लग गई थी कि पार्टी इन्हें किनारे करने वाली है। पार्टी ने धीरे-धीरे इन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से बाहर करना शुरू कर दिया था। यहां राघव चड्ढा भी कोई प्लानिंग कर रहे थे। वो भी पार्टी लाइन से दूरी बनाने लगे।

उदाहरण के लिए, जब 21 मार्च 2024 को पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, तब राघव चड्ढा लंदन में थे। मतलब आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी मुसीबत में राघव चड्ढा गायब थे। केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद करीब 70-80 दिन तक राघव सार्वजनिक रूप से गायब रहे। बहाना दिया कि मेरी आंख की सर्जरी हुई थी, इसलिए मैंने कुछ बोला नहीं। लंदन से वापस आने के बाद भी राघव चड्ढा ने पार्टी की जरूरत में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।

आप से बना ली थी दूरी

केजरीवाल जेल में थे, पार्टी संकट में थी, लेकिन राघव (Raghav Chadha) न तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे और न ही सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे। इससे पार्टी में इन्हें लेकर नाराजगी और बढ़ी।और ऐसा नहीं है कि राघव इस नाराजगी से बेखबर थे। उन्हें अच्छी तरह पता था कि वो क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने भी इधर इनके खिलाफ एक्शन शुरू कर दिया। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AAP की हार के बाद पार्टी ने कई संगठनात्मक बदलाव किए। इस दौरान राघव चड्ढा को पंजाब, गोवा आदि राज्यों की जिम्मेदारियों से बाहर रखा गया।

फिर आया 2026। दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी मामले में राहत दी। लेकिन इस बार भी राघव चड्ढा चुप रहे। उन्होंने न तो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, न प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए और न ही जंतर-मंतर की रैली में पहुंचे।मतलब राघव चड्ढा जानबूझकर आम आदमी पार्टी से दूरी बना रहे थे। वो जानते थे कि आज नहीं तो कल इनकी इन हरकतों की वजह से पार्टी इन्हें बाहर कर ही देगी। पर इन्हें इस बात से कोई डर नहीं था।

Raghav Chadha ने पहले ही कर ली थी प्लानिंग

पार्टी से बाहर होने के बाद क्या करना है, इसकी प्लानिंग राघव चड्ढा बहुत पहले ही कर चुके थे। तभी तो देखिए, राजनीति में राघव 2012 से ही हैं। इसी साल उन्होंने आम आदमी पार्टी जॉइन की थी। 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजेंद्र नगर सीट से MLA भी बन गए थे। और 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद भी चुने गए। लेकिन तब तक इनका आम आदमी प्रेम नहीं जागा था। तब ये आम आदमी के किसी भी मुद्दे की बात नहीं करते थे।

ऐसे बढ़ी फैन फॉलोविंग

लेकिन जब 2024 के बाद पार्टी से इनका मनमुटाव हुआ, या फिर यूं कहें कि इन्होंने मनमुटाव बढ़ाया, तब से अचानक इनके अंदर एक जननेता जाग गया। 2025-26 के समय में राघव चड्ढा अचानक से आम जनता को अट्रैक्ट करने वाले मुद्दों पर बात करने लगे। ऐसे मुद्दों पर जो इन्हें आम जनता की नजर में ला सकते थे. एयरपोर्ट पर महंगे खाने की बात, जोमैटो डिलीवरी बॉयज की बात, तो कभी रिचार्ज की बात, मिडिल क्लास पर लग रहे भारी टैक्स पर भी इन्होंने बात की।

इन्होंने जेन-जी को भी अट्रैक्ट करने वाले मुद्दे निकाले, जैसे पितृत्व अवकाश (पैटर्निटी लीव) पर बात शुरू की। वो भी ऐसे देश में जहां महिलाओं को मैटरनिटी लीव तक ढंग से नहीं मिलती। देखते ही देखते साल भर के अंदर इनकी पहचान बढ़ी, इनकी फैन फॉलोइंग बढ़ गई। लोग जानने लगे कि कोई राघव चड्ढा भी है जो जनता के मुद्दों पर बात करता है। राघव चड्ढा की पीआर टीम ने इस बीच बहुत शानदार काम किया। उनकी इमेज बिल्डिंग पर अच्छा खासा पैसा लगाया गया। वीडियोज बनवाए गए, तमाम इंफ्लुएंसर्स से चड्ढा की तारीफ में।

AAP ने लिया बड़ा फैसला

इससे राघव (Raghav Chadha) की फैन फॉलोइंग और बढ़ गई। राघव चड्ढा बस यही चाहते थे। इसीलिए उन्होंने आम आदमी पार्टी से दूरी बनाई थी। और उनका प्लान सफल भी हो गया। 2 अप्रैल को AAP ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है और उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त कर लिया है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर ये तक कहा कि चड्ढा को सदन में पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए।

क्या इसके पीछे बीजेपी का हाथ?

अब इस फैसले के बाद राघव चड्ढा सामने आए हैं और आम आदमी पार्टी को चेतावनी दी है कि मैं हारा नहीं हूँ, सैलाब बनकर लौटूंगा। अब यहां कई तरह की थ्योरीज चल रही हैं। ज्यादातर का यही मानना है कि इस सब खेल के पीछे भाजपा का हाथ है। भाजपा ने आम आदमी पार्टी को अंदर से कमजोर करने के लिए उसके नेता को तोड़ने की साजिश रची। और राघव चड्ढा को फेम पाने का मौका दिया, पार्टी से दूरी बढ़वाई, ताकि आप खुद ही इन्हें बाहर कर दे।

फिर राघव (Raghav Chadha) जनता का सारा सपोर्ट लेकर भाजपा में शामिल हो जाएं। मतलब एक तीर से दो निशाने। खैर, अब देखना ये होगा कि राघव चड्ढा आगे क्या कदम उठाते हैं। क्योंकि अब अगर ये भाजपा में शामिल हो गए, तो इनकी सारी प्लानिंग एक तरह से फ्लॉप हो जाएगी। जनता तुरंत समझ जाएगी कि पिछले दो साल से उनके साथ मजाक किया जा रहा था।


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