Balen Shah
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Balen Shah ने नेपाल की सत्ता संभालते ही वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना भी भारत जैसे देश में आज के दौर में करना मुश्किल है। सोचिए कि किसी देश में वीआईपी कल्चर पूरी तरह खत्म हो जाए और पुलिस को इतनी खुली छूट हो कि वह सुरक्षा के नाम पर किसी भी बड़े नेता की चेकिंग कर सके। अपराधियों के खिलाफ कड़े एक्शन लिए जाएं और भ्रष्ट लोगों को सीधे जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाए। अगर अनपढ़ों का राजनीति से सफाया हो जाए और सरकार चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों के कंधों पर हो, तो उस देश की तस्वीर क्या होगी?
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और धर्म-जाति की राजनीति से परे विकास का मॉडल लोगों में भरोसे की नई उम्मीद जगाता है। भारत में आज यह भले ही एक सपने जैसा लगे, लेकिन हमारे पड़ोसी देश में Balen Shah ने इसे एक हकीकत बना दिया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बनने के बाद से उन्होंने फिल्म ‘नायक’ के अनिल कपूर की तरह धड़ाधड़ एक्शन लेकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
बालेन ने हिलाई रसूखदारों की कुर्सी
Balen Shah ने प्रधानमंत्री पद संभालते ही सबसे पहले वीआईपी कल्चर की जड़ों पर वार किया है। उनके शासन में आज नेपाल का कोई भी मंत्री या रसूखदार नेता खुद को कानून से ऊपर नहीं समझ सकता। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियम तोड़ने वाले नेताओं को भी वही सजा मिले जो एक आम नागरिक को मिलती है। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम का आलम यह है कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली जैसे दिग्गज नेताओं पर हाथ डालने से भी परहेज नहीं किया।
Balen Shah ने साबित किया कि यदि राजनीतिक नीयत साफ हो, तो वर्षों से सड़े हुए सिस्टम को भी सुधारा जा सकता है। उन्होंने काठमांडू की सड़कों से न केवल अवैध कब्जे हटाए, बल्कि सरकारी बैठकों का लाइव प्रसारण कर जनता के पैसे के उपयोग में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है।
नफरत की राजनीति पर फुल स्टॉप और विकास का नया मॉडल
सबसे बड़ी बात यह है कि Balen Shah ने नेपाल की राजनीति को नफरत और विभाजन से पूरी तरह दूर रखा है। वहां अब न तो जात-पात के नाम पर रोटियां सेकी जा रही हैं और न ही धर्म के आधार पर दीवारें खड़ी की जा रही हैं। वहां की सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ शिक्षा और विकास पर केंद्रित है।
नेपाल के युवाओं के बीच Balen Shah आज एक आइकन बन चुके हैं क्योंकि उन्होंने युवाओं को यह भरोसा दिलाया है कि पढ़ा-लिखा नेतृत्व ही देश का भविष्य बदल सकता है। उन्होंने राजनीति में शिक्षित वर्ग की भागीदारी अनिवार्य कर दी है, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिल रहा है।
भारत में सवाल पूछने पर जेल और भ्रष्टाचार पर रेड कार्पेट
इसके उलट भारत की स्थिति देखें तो मोदी सरकार के दौरान वीआईपी कल्चर का एक नया और डरावना रूप सामने आया है। यहाँ यदि कोई आम नागरिक पुलिस या किसी सत्ताधारी दल के नेता से सवाल पूछने की हिम्मत करता है, तो उसे सीधे जेल की हवा खानी पड़ती है। मोदी राज में पुलिस और प्रशासन रसूखदार नेताओं और उनके चहेते उद्योगपति मित्रों के लिए रेड कार्पेट बिछाने में व्यस्त हैं।
जहाँ Balen Shah ने नेपाल में भ्रष्ट और अनपढ़ नेताओं का राजनीतिक अंत कर दिया है, वहीं भारत में प्रधानमंत्री की डिग्री मांगने भर से ही बड़ा बवाल खड़ा हो जाता है। संसद के भीतर रमेश बिधूड़ी और निशिकांत दुबे जैसे नेता खुलेआम नफरत भरी भाषा और गालियों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई के बजाय उन्हें ईनाम से नवाजा जाता है।
नारी वंदन का शोर और बेटियों को धमकाने वाले BJP सांसद
मोदी सरकार एक तरफ महिलाओं के सम्मान और आरक्षण की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ जब उनके अपने सांसद गर्भवती महिलाओं को ‘उठवाने’ की सरेआम धमकी देते हैं, तो प्रधानमंत्री मौन धारण कर लेते हैं। नेपाल में Balen Shah ने पुलिस बल को पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाया है, जबकि भारत में ईडी, सीबीआई और पुलिस तंत्र को सिर्फ विपक्ष की आवाज कुचलने का हथियार बना दिया गया है।
दलितों और पिछड़ों के खिलाफ अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, खासकर उन राज्यों में जहाँ बीजेपी की अपनी या समर्थित सरकारें हैं। Balen Shah के शासन में वीआईपी गाड़ियों की चेकिंग आम बात है, लेकिन क्या कभी सुना है कि भारत में मोदी सरकार के किसी मंत्री या बीजेपी शासित राज्य में किसी बड़े नेता की गाड़ी रोकी गई हो? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का बुलडोजर भी सिर्फ विरोधियों और एक खास समुदाय को निशाना बनाता है, जबकि भ्रष्ट बीजेपी नेताओं की अवैध संपत्तियां सुरक्षित रहती हैं।
मुफ्त अनाज की लाइन बनाम शिक्षित नेतृत्व
आज नेपाल जैसा छोटा राष्ट्र दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि देश का नेतृत्व अब केवल पढ़ा-लिखा और ईमानदार व्यक्ति ही करेगा। लेकिन भारत में मोदी सरकार जनता को 80 करोड़ मुफ्त अनाज और रसोई गैस की लंबी लाइनों में खड़ा देखकर अपनी पीठ थपथपा रही है। बुनियादी मुद्दों जैसे शिक्षा, महंगाई और बेरोजगारी पर बात करने के बजाय यहाँ का चुनाव हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद के इर्द-गिर्द सिमटा दिया गया है।
मोदी जी को Balen Shah के काम करने के तरीके से सीखना चाहिए कि नायक केवल फिल्मों में नहीं, बल्कि हकीकत में भी बना जा सकता है। मगर इसके लिए उद्योगपति मित्रों का मोह छोड़कर देश की गरीब और लाचार जनता का हाथ थामना होगा। Balen Shah ने दिखा दिया है कि यदि नेता सच में जनता का सेवक बनकर काम करे, तो देश का कायाकल्प मुमकिन है।
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