PM Modi Norway Visit

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PM Modi Norway Visit: आपको क्या लगता है कि मोदी जी अचानक नॉर्वे क्यों गए थे? दरअसल फरवरी 2026 में नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड, जो दुनिया के सबसे बड़े पेंशन फंडों में से एक है, ने अडानी ग्रीन एनर्जी को अपने पोर्टफोलियो से हटा दिया यानी ब्लैकलिस्ट कर दिया। अब ठीक इसी के तीन महीने बाद, 18 मई 2026 को प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे पहुंच जाते हैं। और यह ऐतिहासिक था। करीब 43 सालों के बाद यह पहला मौका था, जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की धरती पर कदम रखा। सोचने वाली बात है क्यों?

विपक्ष का तो सीधा आरोप है कि मोदी जी मित्र के लिए विदेश (PM Modi Norway Visit) गए थे। नॉर्वे से व्यक्तिगत गुजारिश करने कि वह अडानी को अपने पेंशन फंड की ब्लैकलिस्ट से हटा दे। खैर, आपको क्या लगता है, क्या मोदी जी हमारे देश को ऐसी हालत में छोड़कर मित्र के लिए काम करने विदेश जाएंगे?

कांग्रेस लगातार लगाती रही है आरोप (PM Modi Norway Visit)

वैसे जान लीजिए कि विपक्षी पार्टियां, खासकर कांग्रेस अक्सर मोदी जी पर अडानी का एजेंट होने का आरोप लगाती रही है। कांग्रेस ने बार बार कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी का एक ही फंडा है कि विदेश जाऊंगा, दोस्त को धंधा दिलाऊंगा, खूब अमीर बनाऊंगा। विपक्ष ने इसके लिए बार बार आंकड़े भी दिखाए हैं।

लेकिन मामला तब मुद्दा बन गया, जब अक्टूबर 2024 में केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रेला ओडिंगा ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने उस वक्त कहा था कि नरेंद्र मोदी ने मुझे अपने दोस्त गौतम अडानी और उनके बिजनेस के बारे में बताया। जिसके बाद विपक्ष ने मोदी जी पर निशाना साधना शुरू कर दिया।

क्या कहते हैं आकंड़े?

अब बात करते हैं उन आंकड़ों (PM Modi Norway Visit) की, जो कांग्रेस ने शेयर किए थे। इन आंकड़ों के मुताबिक, जून 2015 में नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। इसी साल अगस्त में ही अडानी ने बांग्लादेश को बिजली देने की डील पक्की कर ली। फिर मार्च 2017 में मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। अप्रैल 2017 में अडानी ने मलेशिया में मेगा कंटेनर पोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ी डील साइन कर ली।

जनवरी 2018 में मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। दिसंबर 2018 में अडानी ने इजरायल की कंपनी के साथ मिलिट्री ड्रोन बनाने का काम शुरू किया। जून 2018 में मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। जुलाई 2018 में सिंगापुर की कंपनी ने अडानी पोर्ट्स में 1000 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया।

श्रीलंका यात्रा के बाद भी अडानी को मिला था काम

फरवरी 2020 में मोदी ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। जुलाई 2020 में अडानी को श्रीलंका के पोर्ट ऑपरेट करने की डील मिल गई। जून 2023 में मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। जनवरी 2024 में नेपाल सरकार ने ऐलान किया कि अडानी एयरपोर्ट का निर्माण और मैनेजमेंट देखेंगे। अक्टूबर 2023 की बात है, मोदी ने तंजानिया की राष्ट्रपति से मुलाकात की और मई 2024 में ही अडानी को दार एस सलाम बंदरगाह का कंटेनर टर्मिनल 2, 30 साल के लिए ऑपरेट करने के लिए मिल गया।

वहीं दिसंबर 2023 में मोदी ने केन्या के राष्ट्रपति से मुलाकात की। जून 2024 को अडानी को नैरोबी हवाई अड्डे का काम मिला, लेकिन हाई कोर्ट ने धांधली की आशंका के चलते इस पर रोक लगा दी। इसके बाद जुलाई 2024 में मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री से मुलाकात की। जुलाई 2024 में ही वियतनाम की सरकार ने ऐलान किया कि अडानी ग्रुप उनके हवाई अड्डों में निवेश करेगा।

क्या सच में अडानी के लिए काम करते हैं मोदी? (PM Modi Norway Visit)

ये सारे आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं कि मोदी जी की विदेशी यात्राओं (PM Modi Norway Visit) और अडानी के काम में कोई न कोई संबंध होता है। जब भी मोदी जी किसी देश में दौरा करने जाते हैं, तो वहां पर अगले कुछ ही महीनों में अडानी को कोई न कोई काम मिल जाता है। क्या ये सब कुछ मात्र संयोग है या फिर विपक्ष के आरोपों में कुछ सच्चाई है? मोदी जी की विदेशी यात्राओं का अडानी के काम से संबंध है या नहीं?


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