Rahul Gandhi vs PM Modi

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Rahul Gandhi vs PM Modi: राहुल गांधी भी विदेश जाते रहते हैं और मोदी जी भी। हालांकि मोदी जी कुछ ज्यादा ही विदेश यात्राएं करते हैं, राहुल उतनी नहीं कर पाते। पर आपने कभी नोटिस किया है कि दोनों नेताओं का स्टाइल, मकसद और तरीका एक-दूसरे से कितना अलग रहता है?राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो यूनिवर्सिटी में लेक्चर देते दिखते हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी हो, हार्वर्ड हो या कोई और बड़ी जगह, वहाँ जाकर वो लेक्चर देते हैं।

वो विदेश में भी भारत के भविष्य, लोकतंत्र, युवाओं की समस्याओं और देश को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर गंभीर चर्चा करते हैं। स्टूडेंट्स से सवाल-जवाब होते हैं, डिबेट होती है। सवाल-जवाब की तमाम तस्वीरें और वीडियोज सामने आती हैं, जहां दिखता है कि राहुल गांधी हर सवाल का बेबाकी से जवाब दे रहे होते हैं।

मोदी जी की खीखी वाली आती हैं तस्वीरें (Rahul Gandhi vs PM Modi)

वहीं दूसरी तरफ मोदी जी विदेश जाते हैं तो बस “खीखी” वाली तस्वीरें आती हैं। “हेलो माय फ्रेंड” कहकर जबरदस्ती गले पड़ने की तस्वीरें आती हैं। कभी-कभार पत्रकारों के सवालों से भागने की भी तस्वीरें सामने आ जाती हैं, जैसी इस बार नॉर्वे से आई। कभी वो खुद वीडियोज बनाने लगते हैं, जैसे आज मेलोनी के साथ मेलोडी टॉफी लेकर बनाई। मतलब एक नेता विदेश जाता है तो गंभीर लेक्चर देता है और भारत की बात करता है, वहीं महामानव विदेश जाते हैं तो बस मौज-मस्ती करते हैं।

विदेश में भी देश की बात करते हैं राहुल

राहुल गांधी (Rahul Gandhi vs PM Modi) देश के बाहर जाकर भी देश की बात करते हैं। वो बताते हैं कि भारत को कैसे मजबूत बनाया जाए, युवाओं को नौकरियां कैसे दी जाएं, महंगाई कैसे कम की जाए, बेरोजगारी पर कैसे लगाम लगाई जाए। उनका फोकस हमेशा भारत की प्रगति और समस्याओं के समाधान पर होता है।

मोदी जी विदेश जाकर अपना प्रचार-प्रसार करवाते हैं। “मोदी है तो मुमकिन है” वाला स्लोगन, अपनी तस्वीरें, अपनी उपलब्धियां गिनाना, टॉफी बांटना, जोक्स चलाना, रीलें बनवाना, ये सब करते हैं। देश की असली मुसीबतों की बात कम, खुद की छवि चमकाने का काम ज्यादा करते हैं।

सवालों से नहीं डरते राहुल, मोदी करते हैं ठीक उलटा (Rahul Gandhi vs PM Modi)

राहुल गांधी और पीएम मोदी (Rahul Gandhi vs PM Modi) में तीसरा और सबसे बड़ा अंतर है- सवालों का सामना करने की ताकत। राहुल गांधी पत्रकारों के सवालों से कभी नहीं डरते। कोई भी सवाल हो, वो निडरता से, साफ-साफ जवाब देते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़े होकर घंटों जवाब देते हैं। आलोचना हो, तीखा सवाल हो, वो भागते नहीं, शांति से जवाब देते हैं। यही एक सच्चे लीडर की पहचान है।

तो वहीं मोदी जी सवालों से भागते हैं। ताज़ा उदाहरण देख लीजिए नॉर्वे का। नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ जॉइंट स्टेटमेंट के बाद जब नॉर्वे की एक पत्रकार हेले लेंग ने मोदी जी से सवाल किया, तो वो झट से वहां से भागते हुए नजर आए। यहीं अगर राहुल गांधी होते तो बिना जवाब दिए कभी नहीं वहां से हटते। लेकिन ये तो मोदी जी थे। इन्हें तो सवालों से भागने की आदत है। शुरू से ही ये सवालों से भागते रहे हैं। तभी तो इन्हें सत्ता में आए आज 12 साल हो गए, लेकिन आज तक इन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। वहीं राहुल गांधी इतने समय में 129 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं।

देश को कौन सा नेता चाहिए?

ये फर्क (Rahul Gandhi vs PM Modi) सिर्फ स्टाइल का नहीं, सोच का है। राहुल गांधी जवाबदेही दिखाते हैं। वो मानते हैं कि लीडर को जनता और मीडिया के सामने जवाब देना पड़ता है। जबकि मोदी जी टेलीप्रॉम्प्टर और स्क्रिप्टेड इवेंट्स पर भरोसा करते हैं। इन दो नेताओं में एक और बहुत बड़ा अंतर है। राहुल गांधी जहां दिल से बात करते हैं, वहीं मोदी जी हमेशा स्क्रिप्ट पढ़ने का काम करते हैं। जहां जाते हैं, टेलीप्रॉम्प्टर लिए जाते हैं और फिर उसी से देखकर भाषण देते हैं। कभी भी कहीं भी खुद के शब्द नहीं होते इनके। हर बार स्क्रिप्ट ही होती है।

कहने का मतलब है कि एक नेता (Rahul Gandhi vs PM Modi) देश की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करता है, दूसरा वीडियो वायरल करवाने में लगा रहता है। एक सवालों का सामना करता है, दूसरा भाग जाता है। एक यूनिवर्सिटी में लेक्चर देता है, दूसरा टॉफी बांटता है। अब देश को सोचने की जरूरत है कि उसे कैसा लीडर चाहिए। कैसे लीडर की उसे जरूरत है।


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