Muslims want Cow as National Animal
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Cow as National Animal: मुसलमानों ने कुछ ऐसा कारनामा किया है कि भाजपा परेशान हो गई है। अब समझ नहीं पा रही है कि करे तो करे क्या। दरअसल देशभर के अलग-अलग हिस्सों से मुसलमानों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग शुरू कर दी है। बंगाल से शुरू हुई यह मुहिम अब देशभर तक पहुंच गई है। कल बकरीद के मौके पर यूपी, बिहार से लेकर राजस्थान तक के मुसलमानों ने हाथों में तख्तियां लेकर मोदी सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है।
गौरक्षा के नाम पर होती थी हिंसा
अभी तक भाजपा गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों को बदनाम किया करती थी। गिरफ्तारियां होती थीं। कई बार मुसलमानों के साथ गौरक्षा के नाम पर हिंसा तक होती थी। लेकिन अब मुसलमान खुद गाय (Cow as National Animal) के लिए खड़ा हो गया है। ऐसे में भाजपा और फर्जी गौरक्षक बड़े परेशान हैं। समझ नहीं पा रहे कि अब समाज में नफरत कैसे फैलाएं।
इन राज्यों से उठ रही है मांग (Cow as National Animal)
यूपी के अमरोहा में ईदगाह में हजारों मुसलमानों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। बिहार के किशनगंज में बकरीद पर मुस्लिम युवा मस्जिद के सामने गाय के पोस्टर लेकर खड़े हो गए और मांग करने लगे कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। इसी तरह दरभंगा में भी मुस्लिम समाज ने गाय (Cow as National Animal) को लेकर इसी तरह की मांग उठाई।
दरभंगा में बकरीद के अवसर पर नमाज अदा करने के बाद नमाजियों ने हाथों में तख्तियां लेकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और बीफ का निर्यात पूरी तरह से बंद करने की मांग की है। राजस्थान के जैसलमेर में तो इससे भी बड़ा कदम उठाया गया। यहां ईद की नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा गाय (Cow) को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया जिसमें लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कुल मिलाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करवाने के लिए मुस्लिम समाज एकदम अड़ गया है। मुसलमानों ने साफ कह दिया है कि अब वो गाय (Cow) का मांस नहीं खाएंगे और न ही गाय खरीदेंगे। कुर्बानी तो छोड़ ही दीजिए।
बीजेपी के सामने खड़ी हो गई मुश्किल
अब असली समस्या भाजपा के सामने खड़ी हो गई है। भाजपा सालों से गौरक्षा के नाम पर वोट लेती आई है। गौरक्षक बनकर हमेशा इन्होंने हिंदुओं से वोट लिए हैं। लेकिन असल में गायों (Cow) की कोई चिंता नहीं है इन्हें। जब वोट चाहिए होता है तब गाय माता और जब सत्ता आ जाती है तो गाय को कोई पूछता तक नहीं है।
राजस्थान से आया भयानक वीडियो
अभी हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर में एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया था जहां कचरा डंपिंग साइट पर 500 से ज्यादा गायों के सड़े हुए शव पड़े मिले। ये तस्वीरें देखकर किसी का भी दिल टूट जाएगा। लेकिन भाजपा की सरकार में किसी की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं हुईं। कोई गौरक्षक वहां प्रदर्शन करने नहीं पहुंचा। कोई मंत्री रोने-धोने नहीं आया। कोई एक्शन नहीं लिया गया।
बंगाल में हुआ और कमाल
बंगाल में तो और कमाल हो गया। यहां नई-नई आई सुवेंदु सरकार ने फैसला लिया है कि बंगाल में आप 14 साल से छोटी गाय (Cow) नहीं काट सकते लेकिन 14 साल से बड़ी गाय को काटकर खा सकते हैं। इनके कहने का मतलब है कि 14 साल तक गाय माता है पूजनीय है और जैसे ही 14 साल पार कर गई वो खाने लायक हो गई। ये सुनने के बाद अच्छे-अच्छे हिंदू का दिमाग खराब हो गया है। लेकिन भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ा और न ही उन गौरक्षा दलों को फर्क पड़ा जो गाय के नाम पर समाज में हिंसा फैलाया करते हैं।
असम में तो खुद को बहुत बड़े हिंदू बताने वाले हिमंता बिस्वा सरमा ने वोट के लिए अपना हिंदुत्व ही बेच दिया। जब वोट चाहिए था तो हिमंता मुसलमानों को कह रहे थे कि गोमांस खाओ मैंने रोका नहीं है बस घर के अंदर खाना। मतलब सार्वजनिक जगह पर मत खाओ मंदिर के पास मत खाओ लेकिन घर में खा लो। सोचिए किस तरह के गौप्रेमी हैं ये लोग।
वोट के लिए गाय का इस्तेमाल करती है बीजेपी
असलियत ये है कि भाजपा को पता है कि गाय (Cow) के नाम पर इन्हें वोट मिलते हैं इसीलिए ये हर बार गौरक्षा को मुद्दा बनाते हैं। पर अब मुसलमान ये बात अच्छी तरह से समझ गए हैं इसीलिए उन्होंने गाय के लिए मुहिम छेड़ दी है। अब भाजपा चुप है। भाजपा का कोई भी नेता गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की इस मांग पर कोई बयान नहीं दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि वो डरे हुए हैं। क्योंकि अब उनके पास मुसलमानों के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं बचा। अब उन्हें नफरत छोड़कर अपने काम के बलबूते वोट मांगने होंगे जो भाजपा के लिए सबसे बड़ी समस्या है।
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