TMC- Congress Merger
TMC- Congress Merger: आज पश्चिम बंगाल की राजनीति में जो कुछ हो रहा है, वो किसी बड़े भूकंप से कम नहीं है। टीएमसी यानी तृणमूल कांग्रेस, जो कभी बंगाल की सबसे ताकतवर पार्टी मानी जाती थी, उसका अब अंत हो चुका है। ममता बनर्जी की पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गई। ममता बनर्जी खुद अपनी सीट तक हार गईं। टीएमसी के जो नेता कल तक बीजेपी को भ्रष्टाचारी लगते थे, आज वे एक-एक करके बीजेपी में शामिल हो रहे हैं।
खत्म हो गई टीएमसी (TMC- Congress Merger)
आधे से ज्यादा विधायक और नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में जा चुके हैं। टीएमसी अब टूट चुकी है। पहले 58 विधायक बागी हुए, फिर 20 सांसद बागी हुए। दो दिन पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु रॉय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। और अब सबसे बड़ी खबर ये आ रही है कि टीएमसी कांग्रेस में विलय करने जा रही है। इसे लेकर टीएमसी ने कांग्रेस से मीटिंग शुरू कर दी है। पहले ममता बनर्जी कांग्रेस संरक्षक सोनिया गांधी से मिलीं। उसके बाद आज सुबह डेरेक ओ ब्रायन और अभिषेक बनर्जी 10 जनपथ पर फाइल लेकर राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात ने विलय (TMC- Congress Merger) की खबरों को और हवा दे दी है।
ममता का टूटा घमंड
लोग कह रहे हैं कि अब टीएमसी (TMC- Congress Merger) का नामोनिशान खत्म होने वाला है। ममता आज किस हाल में होंगी, ये वही जानती हैं। दीदी पहले कितनी अकड़ में रहती थीं। वो खुद को प्रधानमंत्री का दावेदार समझती थीं। इंडिया गठबंधन में शामिल होने के बाद भी कभी-कभी गठबंधन से अलग बयान दे देती थीं। लेकिन आज उनका सारा घमंड चूर-चूर हो गया। जब अपनी ही सीट नहीं बच पाई, तो अब समझ आया कि अकेले कुछ नहीं हो सकता। इसीलिए अब कांग्रेस में विलय (TMC- Congress Merger) होने का फैसला ले लिया है। वो समझ गई हैं कि अब कांग्रेस ही है, जो बीजेपी का सामना कर सकती है और उनके अस्तित्व को बचा सकती है।
बीजेपी का सामने सिर्फ कांग्रेस ही टिक पाई
आज पूरा देश देख रहा है कि कोई भी विपक्षी पार्टी बीजेपी के सामने टिक नहीं पा रही है, सिवाय कांग्रेस के। वो कांग्रेस ही है, जो शुरू से आज तक बीजेपी के सामने डटकर खड़ी है। बीजेपी की सारी चालें कांग्रेस के आगे फेल हो जाती हैं। वैसे तो बीजेपी ने कांग्रेस को भी खत्म करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी डटे रहे। उनकी कूटनीति और राजनीतिक समझ की वजह से कांग्रेस बची रही और बीजेपी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। इसी वजह से आज राजनीति में अगर किसी को असली चाणक्य कहा जा सकता है, तो वो राहुल गांधी ही हैं।
आलोचकों को समझ आ रही गलती
जो लोग सोचते थे कि कांग्रेस खत्म हो गई, क्षेत्रीय दल उसे हमेशा के लिए कुचल देंगे, उन्हें भी अब अपनी गलती समझ आ रही है। राहुल गांधी ने चुपचाप, बिना शोर मचाए, चुन-चुनकर सबका हिसाब चुकता कर दिया है। देखिए क्या कुछ हुआ है पिछले कुछ सालों में। बिहार में आरजेडी बुरी तरह कमजोर हो गई है। लालू परिवार को आज बिहार में कोई पूछ तक नहीं रहा। पश्चिम बंगाल में टीएमसी सत्ता से बाहर हो गई। ममता बनर्जी, जो खुद को विपक्ष का सबसे बड़ा नेता मानती थीं, वो आज अपनी ही सीट हार चुकी हैं। पार्टी के आधे से ज्यादा विधायक बीजेपी में जा चुके हैं।
उधर तमिलनाडु में डीएमके को करारी हार मिली है। दिल्ली में आप की सरकार चली गई। पार्टी के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हो गए। महाराष्ट्र में एनसीपी दो टुकड़ों में बंट गई। और उत्तर प्रदेश में सपा दो बार चुनाव हार गई। ये वही क्षेत्रीय दल थे जिन्होंने 1990 के दशक से लेकर 2014 तक कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। और ये सब खत्म हो चुके हैं।
कांग्रेस के दरवाजे पर आई ममता
आज बीजेपी के सामने डटकर अगर कोई खड़ा है, तो वो है कांग्रेस और राहुल गांधी। आज जो हो रहा है, वो सिर्फ टीएमसी का अंत नहीं है। ये क्षेत्रीय दलों की राजनीति का अंत है। लोग अब समझ गए हैं कि मजबूत विपक्ष चाहिए तो कांग्रेस के पास आना होगा। अभिषेक बनर्जी की राहुल गांधी से मुलाकात इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। ममता बनर्जी जो कभी अकेले बंगाल संभालती थीं, आज मजबूरी में कांग्रेस के दरवाजे (TMC- Congress Merger) पर पहुंच गई हैं। ये दिखाता है कि समय कितना बदल गया है।
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