PM Modi in America

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PM Modi took training in America: अमेरिका का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी सरकार द्वारा संचालित प्रोग्राम्स का हिस्सा रहे हैं। और सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, केंद्र सरकार के तीन वर्तमान कैबिनेट मंत्री और लगभग 150 भारतीय सिविल अधिकारी इन कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं। ये सब हुआ है साल 1993 में। अमेरिकी विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी मॉरिसन ने ये बातें कही हैं।

अब सवाल ये है कि आखिर PM Modi और उनके ये तीन मंत्री किस तरह की ट्रेनिंग लेने अमेरिका गए थे। ऐसी कौन सी खास ट्रेनिंग PM Modi ने ली, जो अमेरिका से लौटते ही जादू हो गया गुजरात में। आपको बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक PM Modi का पहला अमेरिकी दौरा 1993 में हुआ। इसके बाद मोदी ने अमेरिका के तीन दौरे और किए। इन दौरों की तमाम तस्वीरें आज भी इंटरनेट पर मौजूद हैं। एक तस्वीर में तो PM Modi व्हाइट हाउस के बाहर भी नजर आ रहे हैं।

मोदी ने आखिरी दौरा कब किया?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो PM Modi का आखिरी अमेरिकी दौरा 1999 में हुआ जहां उन्होंने कथित तौर पर ट्रेनिंग भी ली थी। ये ट्रेनिंग किस विषय की थी, किसने दी और कहां दी, इस बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस दौरे पर ट्रेनिंग लेने के तुरंत बाद 2001 में गुजरात में जादू हुआ। रहस्यमई तरीके से गुजरात के मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का इस्तीफा ले लिया गया, जो भाजपा को गुजरात में बहुमत दिलवाकर लाए थे।

फिर केशुभाई पटेल की जगह कई सीनियर नेताओं को दरकिनार करके मोदी को मुख्यमंत्री बना दिया गया, जो उस समय विधायक तक नहीं चुने गए थे। उन्हें राज्यसभा से गुजरात विधानसभा में नामित किया गया और मुख्यमंत्री बना दिया गया। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। मोदी के शपथ लेते ही कुछ महीने के अंदर गुजरात में दंगे हुए। वही दंगे जिन पर अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद मीडिया के सामने PM Modi को राजधर्म का पालन करने की सलाह दे दी थी। खबरों के मुताबिक वाजपेयी दंगों के तरीके से नाराज थे और शुरुआत में PM Modi को हटाने के पक्ष में थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अब उठ रहे सवाल

अब अमेरिका के इस बयान के बाद कहीं न कहीं सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर अमेरिका से कौन सी ट्रेनिंग लेकर मोदी भारत लौटे, जो इन्हें आते ही मुख्यमंत्री बना दिया गया। सवाल आज के अमेरिका के प्रति इनके बर्ताव को लेकर भी खड़े होते हैं। सारे प्रोटोकॉल तोड़ते हुए, सभी नियमों को ताक पर रखते हुए PM Modi ने ट्रंप के चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया। फिर ट्रंप ने भी जमकर मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए प्रचार किया।

मोदी ने बार-बार किया सरेंडर

इसके बाद से लगातार PM Modi अमेरिका के आगे सरेंडर करते नजर आए। चाहे वो टैरिफ लगाने का मामला हो, अडानी के केस का मामला हो, अमेरिका द्वारा भारतीयों को बेड़ियों में बांधकर वापस भेजने का मामला हो, किसान विरोधी ट्रेड डील हो, ऑपरेशन सिंदूर हो या फिर अमेरिका द्वारा तीन भारतीय नाविकों की हत्या का मामला हो, PM Modi हर कदम पर अमेरिका के आगे झुके हुए दिखाई दिए। अमेरिका के खिलाफ PM Modi के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता। उल्टा ये एक के बाद एक वही काम करते रहे जो अमेरिका चाहता था।

इन्होंने कभी भी अमेरिका के सामने भारत का स्टैंड नहीं रखा। अमेरिका जो मन में आया वो बयान देता रहा। ट्रंप भी बार बार भारत का अपमान करते रहे, लेकिन मजाल है कि PM Modi ने एक बार भी पलटकर ट्रंप को कहा हो कि तुम ज्यादा बोल रहे हो। एक बार भी ऐसा नहीं हुआ। उल्टा PM Modi हमेशा ट्रंप के आगे जी हूजूरी करते नजर आए। भले ही उससे भारत का कितना भी नुकसान क्यों न हो। अमेरिका को जवाब नहीं दिया इन्होंने। ऐसे में सवाल उठना चाहिए कि आखिर अमेरिका के पास ऐसा क्या हथियार है, ऐसा कौन सा राज है, जिसके डर से PM Modi हमेशा उसके इशारों पर चलते हैं।


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