Scams in Modi Government
Scams in Modi Government: मोदी जी ने 2014 में सत्ता संभालते वक्त बड़ा जुमला दिया था, न खाऊंगा, न खाने दूंगा। लेकिन आज 12 साल बाद हालत ये है कि उनके राज में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। हर तरफ घोटाले, हर तरफ लूट चल रही है। अभी हाल फिलहाल में ही 3 बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं।
राम मंदिर में घोटाला (Scams in Modi Government)
सबसे पहला और सबसे बड़ा है राम मंदिर घोटाला। पहले तो राम मंदिर के नाम पर जमीनों का घोटाला हुआ। मंदिर बनने से पहले ही वहां जमीन का बड़ा खेल खेला गया। कुछ लोगों ने सस्ती जमीन खरीदी और कुछ ही मिनट बाद राम मंदिर ट्रस्ट को कई गुना महंगे दाम पर बेच दी। एक जमीन 2 करोड़ में खरीदी गई और उसी दिन ट्रस्ट को 18.5 करोड़ में बेच दी गई। दूसरी जमीन 3 करोड़ की खरीदी गई और 24 करोड़ में बेची गई। और एक 9 करोड़ की 55 करोड़ में बेची गई। ये सौदे मिनटों में हुए।
मंदिर बनने के बाद भी लूट रुकी नहीं। अब मंदिर बनने के बाद दान की लूट (Scams in Modi Government) चल रही है। खबरें हैं कि अयोध्या के राम मंदिर में आए दान के पैसों का गलत इस्तेमाल किया गया। ये घोटाला करोड़ों का है। फिलहाल जांच हुई तो 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव भी शामिल है। वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। मामले की अभी भी जांच चल रही है। जल्द ही इसमें और खुलासे सामने आएंगे।
मोहन यादव जमीन घोटाला
तो वहीं दूसरा घोटाला है मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का जमीन घोटाला। दरअसल मध्य प्रदेश के उज्जैन में इस समय बड़े स्तर पर विकास का काम चल रहा है। नई सड़कें बन रही हैं, हाईवे आ रहे हैं। लेकिन इस सबके बीच चल रहा है बहुत बड़ा घोटाला। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री इस घोटाले में शामिल हैं। उनके साथ उनका पूरा परिवार इसका हिस्सा है। इस सबकी शुरुआत हुई दिसंबर 2023 में, जब मोहन यादव मुख्यमंत्री बने। उनके मुख्यमंत्री बनते ही उनके परिवार के लोगों ने उज्जैन में जमीनें खरीदनी शुरू कर दीं। मात्र दो साल में उन्होंने 137 प्लॉट खरीद लिए, जो कुल 168 एकड़ जमीन बनती है।
ये कोई सामान्य खरीद फरोख्त नहीं थी। ये प्लॉट सरकारी प्रोजेक्ट्स के ठीक आस पास खरीदे गए। मतलब सरकार प्रोजेक्ट की घोषणा करती और उनका परिवार उसी इलाके में जमीन खरीद लेता। इस पूरे खेल में मोहन यादव का पूरा परिवार शामिल है। पत्नी, बहू, भाई, भाई की पत्नी, भाई के बेटे, चचेरे भाई सबके नाम पर प्लॉट खरीदे गए। ये खुली लूट है, जिसमें खुद मुख्यमंत्री और उनका परिवार लगा हुआ है।
कृषि राज्य मंत्री ने भी किया घोटाला
तीसरा घोटाला सामने आया है मोदी के मंत्री भागीरथ चौधरी का। खबर है कि मोदी सरकार के कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिल गई है। खास बात ये है कि जो मंत्रालय ये सब्सिडी देता है, उसी मंत्रालय के मंत्री हैं भागीरथ चौधरी। 2024 में नेता जी मंत्री बने। 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया। सिर्फ 14 दिन में अप्रूवल मिल गया। मतलब फटाक से पैसा मंजूर हो गया।
जबकि 2018 में भी इन्होंने सब्सिडी के लिए कोशिश की थी, लेकिन तब नहीं मिली। पर अब मंत्री बनते ही जादू हो गया। असलीयत ये है कि मोदी सरकार के मंत्री किसानों की मदद के नाम पर खुद की जेब भर रहे हैं। जिस मंत्रालय की जिम्मेदारी किसानों को मदद पहुंचाने की है, उसी मंत्रालय का मंत्री लूट करने में लगा हुआ है। एक तरफ किसान आत्महत्या कर रहे हैं, दूसरी तरफ मंत्री खीरे की खेती पर करोड़ों की सब्सिडी ले रहे हैं।
ये मोदी राज नहीं, घोटाला राज
कुल मिलाकर मोदी राज में हर महीने कोई न कोई घोटाला (Scams in Modi Government) सामने आ ही रहा है। शुरु से यही हाल रहा है। कभी इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाला, कभी अडानी घोटाला, कभी राफेल घोटाला तो कभी कोई घोटाला। लिस्ट बहुत लंबी है। मोदी सरकार ने भले ही न खाऊंगा न खाने दूंगा का नारा दिया था, लेकिन हकीकत ये है कि आज उनके राज में सबसे ज्यादा खाने वाले और खिलाने वाले लोग भरे पड़े हैं।
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