BJP's Propaganda Exposed

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BJP’s Propaganda Exposed: लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया बिल मोदी सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इस बिल में संसद की 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लेकिन विपक्ष ने एकजुटता दिखाई और बिल को पास नहीं होने दिया। जान लीजिए कि लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। अब 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। और मोदी सरकार के मंसूबे सफल नहीं हो पाए।

दो तरह की थ्योरीज

अब यहां पर कई तरह की थ्योरीज चल रही हैं। सत्ता पक्ष अपनी कहानी सुना रहा है कि हमने तो महिलाओं के लिए बिल लाने की कोशिश की, पर विपक्ष ने हमें रोक दिया। यानी विपक्ष ही महिला विरोधी है। हम तो अच्छे लोग हैं। अब अगर आप मोदी सरकार की इस बात पर यकीन कर रहे हैं तो ठहरिए जरा। कुछ बातें (Propaganda Exposed) हैं जो आपको जाननी चाहिए।

सरकार ने चली थी चाल (BJP’s Propaganda Exposed)

पहली और सबसे जरूरी बात ये है कि सरकार को पहले से पता था कि ये बिल पास नहीं होने वाला है। इसके कई ठोस कारण हैं। पहले तो ये जान लीजिए कि किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी है। और ये बिल भी संविधान संशोधन था। मतलब इसे पास कराने के लिए भी लोकसभा में दो तिहाई बहुमत चाहिए था।

अब भाजपा प्लस एनडीए के पास साधारण बहुमत तो था, लेकिन दो तिहाई बहुमत नहीं था। विपक्ष में बैठी सारी पार्टियां, कांग्रेस से लेकर डीएमके, समाजवादी, टीएमसी पहले से ही साफ कर चुकी थीं कि वो परिसीमन के साथ महिला आरक्षण बिल को सपोर्ट नहीं करेंगी।

यानी वोटिंग के पहले ही ये बात एकदम क्लियर (Propaganda Exposed) थी कि बिल पास नहीं होगा। क्या मोदी सरकार को ये गणित नहीं पता था? जाहिर सी बात है कि सरकार को ये सब कुछ अच्छी तरह पता था। तो सवाल ये है कि फिर भी उन्होंने बिल पेश किया, तो क्यों किया?

पहले से सब था तैयार

अब जरा ये देखिए। ये एनडीए की महिला सांसदें हैं जो संसद के बाहर प्रदर्शन (Propaganda Exposed) कर रही हैं। विपक्ष के खिलाफ। ध्यान से देखिए, इन सारी महिलाओं के हाथ में पोस्टर हैं। इधर बिल हारा और उधर एनडीए की महिला सांसदों ने तुरंत पोस्टर लेकर विरोध शुरू कर दिया। अब जरा सोचिए, पोस्टर, नारे और प्लानिंग रातोंरात हो सकती है क्या? कुछ देर पहले ही बिल हारा और कुछ ही मिनटों में इन सांसदों के पास पोस्टर आ गए, नारे तैयार हो गए। कैसे हुआ ये सब?

एक ही कारण (Propaganda Exposed) समझ आता है। ये सारी तैयारी पहले से की गई थी। पोस्टर पहले से तैयार थे, नारे पहले से तैयार कराए गए थे। सब कुछ स्टेज्ड था। इसका मतलब है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर बिल लाकर विपक्ष को महिला विरोधी बताने का ट्रैप सेट किया था। उन्हें पता था कि बिल पास नहीं होगा और इसी बहाने उन्हें एक मुद्दा मिल जाएगा विपक्ष को बदनाम करने का।

फेल हुई मोदी सरकार

पर सरकार यहां भी फेल हो गई। मोदी सरकार की इस सारी साजिश को जनता समझ गई है। इस बार सरकार के जाल में कोई नहीं फंसा। जनता ने विपक्ष की बातें भी सुनी और सत्ता पक्ष के जुमले भी सुने। जनता ने देखा कि राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव, स्टालिन, पूरा विपक्ष बार बार कह रहा था कि महिला आरक्षण लागू करो, हम पूरा समर्थन करेंगे।

लेकिन परिसीमन के साथ नहीं करेंगे। यानी विपक्ष महिला विरोधी नहीं है। वो सिर्फ परिसीमन के खिलाफ है। लेकिन सरकार ने जानबूझकर ये ड्रामा (Propaganda Exposed) किया ताकि कल को चुनाव में कह सके कि देखो, ये लोग महिलाओं के खिलाफ थे।

दूसरी थ्योरी क्या कहती है?

एक और थ्योरी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि बीजेपी को अगले लोकसभा चुनाव में हार का डर सता रहा है। बीजेपी को पता है कि वो 2029 में हारने वाली है। इसलिए जल्दबाजी में लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने की कोशिश की। ताकि उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे अपने मजबूत राज्यों में सीटें बढ़ जाएं और दक्षिण के राज्यों की सीटें कम हो जाएं।

सरकार जानती है कि अगर नई जनगणना के बाद परिसीमन होगा तो यूपी की सीटें 80 से 150 तक पहुंच जाएंगी। और दक्षिण की सीटें लगभग वैसी ही रहेंगी। मतलब 2029 में बीजेपी को कम सीटों पर भी बहुमत मिल सकता था। लेकिन विपक्ष ने एकजुट होकर ये सारी चाल (Propaganda Exposed) फेल कर दी। यहां मोदी सरकार चाह रही थी कि चित भी उनकी हो और पट भी उनकी। पर विपक्ष की ताकत ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।?


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