PM Modi
PM Modi देश के भीतर रहने के बजाय अक्सर अंतरराष्ट्रीय दौरों पर सक्रिय नजर आते हैं। वह अभी हाल ही में यूरोप के चार देशों की यात्रा संपन्न करके लौटे ही थे कि एक बार फिर अपने नए विदेशी दौरे पर जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 13 से 18 जून तक वह फ्रांस और स्लोवाकिया के महत्वपूर्ण दौरे पर रहने वाले हैं।
इस नई कूटनीतिक यात्रा की शुरुआत वह फ्रांस के खूबसूरत शहर नीस से करेंगे। इसके बाद 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता तय है, जिसे विपक्ष महज एक दिखावा और नाटक करार दे रहा है। इसी दिन वह स्लोवाकिया के लिए उड़ान भरेंगे, जहां से पुनः फ्रांस लौटकर एवियन शहर में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
जनता के पैसों से वीआईपी यात्राओं की सच्चाई
इस निरंतर आवाजाही के बीच मुख्य राजनीतिक और सामाजिक सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर क्यों PM Modi बार-बार इन विदेशी दौरों की तरफ रुख करते हैं? आलोचकों का आरोप है कि देश की आम जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से इन बेहद खर्चीले वीआईपी दौरों को अंजाम दिया जाता है। इस कूटनीति के पीछे असल उद्देश्य अपने चुनिंदा और खास उद्योगपति मित्रों को विदेशों में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स तथा टेंडर दिलाना मात्र बनकर रह गया है।
आज जब देश की आम जनता रिकॉर्ड तोड़ महंगाई, आर्थिक मंदी और बेरोजगारी के गंभीर संकट से लगातार जूझ रही है, तब प्रधानमंत्री के लिए विदेशों में रेड कार्पेट पर चलने का यह शौक समझ से परे दिखाई देता है।
फ्रांस और अमेरिका के सबसे महंगे दौरों का लेखा-जोखा
विदेशी दौरों पर होने वाले इस भारी-भरकम व्यय के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति और भी चिंताजनक प्रतीत होती है। फरवरी 2025 में जब PM Modi ने फ्रांस का दौरा किया था, तो वह उनका अब तक का सबसे महंगा एकल दौरा साबित हुआ था। इस इकलौते दौरे पर देश के टैक्सपेयर्स की जेब से 25 करोड़ रुपये से भी अधिक की बड़ी धनराशि फूंक दी गई थी। ऐसे में उनके इस आगामी फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर होने वाले नए खर्च को लेकर भी जनता के मन में आशंकाएं गहराने लगी हैं।
इतना ही नहीं, PM Modi ने अब तक सबसे अधिक खर्च अमेरिका की यात्राओं पर किया है, जहां उनके विभिन्न दौरों पर अब तक कुल 74 करोड़ रुपये से ज्यादा की सरकारी राशि खर्च की जा चुकी है।
कॉर्पोरेट मित्रों को फायदा और फोटो सेशन का आरोप
यही वजह है कि आज देश का जागरूक नागरिक और विपक्ष यह पूछने पर विवश है कि इस सरकारी कूटनीतिक फोटो सेशन के अलावा आखिरकार भारत को इन दौरों से हासिल क्या होता है? जमीनी असलियत तो यही बयां करती है कि इन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से देश के आम नागरिकों को कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलता।
इसके विपरीत, इन दौरों के माध्यम से केवल उनके कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट मित्र ही मालामाल होते दिखाई देते हैं। विदेशों में जाकर जो बड़े-बड़े टेंडर और समझौते साइन किए जाते हैं, उनका सीधा आर्थिक लाभ देश की झोली में आने के बजाय साहब के करीबी उद्योगपतियों की जेबों में चला जाता है। अब एक बार फिर वही पुरानी कहानी दोहराने के लिए फ्रांस और स्लोवाकिया की पूरी पृष्ठभूमि तैयार की जा चुकी है, जहां PM Modi भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
पिछले दस वर्षों में 762 करोड़ रुपये का भारी व्यय
सत्ता संभालने के बाद से प्रधानमंत्री के इन विदेशी दौरों पर हुए कुल खर्च का आधिकारिक सच जानकर किसी के भी होश उड़ सकते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से लेकर 2025 तक, यानी पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल में PM Modi के इन दौरों पर देश के राजस्व से 762 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।
अगर केवल पिछले 5 वर्षों (2021 से 2025 के बीच) की अवधि का विश्लेषण करें, तो इस दौरान 43 देशों की यात्रा करने के लिए PM Modi द्वारा 462.58 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए हैं। यह वित्तीय आंकड़े दर्शाते हैं कि वैश्विक संपर्क के नाम पर देश के खजाने पर कितना भारी दबाव डाला गया है।
रखरखाव और सुरक्षा के नाम पर हजारों करोड़ का तामझाम
आपको यह भी स्पष्ट कर दें कि उपर्युक्त आंकड़े तो केवल यात्राओं के सीधे और प्रत्यक्ष खर्चों को दर्शाते हैं। यदि हम PM Modi के विशेष विमान, उनकी सुरक्षा व्यवस्था, उच्च स्तरीय मेंटिनेंस और अन्य प्रशासनिक तामझाम पर होने वाले अप्रत्यक्ष व्यय की बात करें, तो यह संचयी आंकड़ा कई हजार करोड़ रुपये के पार चला जाता है।
एक पुराना सरकारी रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि करता है कि जून 2014 से जून 2018 के बीच की शुरुआती अवधि में ही कुल 1,484 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जिसमें से अकेले प्रधानमंत्री के विमान के रखरखाव पर 1,088 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आया था। ऐसे में, जहां देश का एक बड़ा वर्ग बुनियादी सुविधाओं और पाई-पाई के लिए संघर्ष कर रहा हो, वहां PM Modi के हवाई जहाज को चमकाने और विदेशी दौरों पर हजारों करोड़ लुटाना एक गंभीर प्रश्न बनकर खड़ा है।
