Modi's Love for China is harming India now
Modi’s Love for China: जिस चीन को मोदी जी को लाल आंख दिखाना था, उसी चीन के साथ प्रधानमंत्री इलू इलू कर रहे हैं। अब तो हद हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चीन प्रेम के चक्कर में देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं। दरअसल खबर आई है कि मोदी सरकार ने 4 चीनी कंपनियों को सरकारी बिजली टेंडर में हिस्सा लेने की छूट दे दी है। मतलब ये चीनी कंपनियां अब भारत के बिजली प्रोजेक्ट्स में बोली लगा सकेंगी। बिजली क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन सरकार इन कंपनियों को अंदर घुसने दे रही है।
China भारत विरोधी देश
ये वही China है जो हर तरफ से भारत के खिलाफ काम कर रहा है। फिर भी मोदी सरकार उसके लिए पलकें बिछा रही है। सोचिए, ये कितना खतरनाक है। याद कीजिए गलवान घाटी। 2020 में चीन ने हमारी सीमा पर घुसपैठ की। हमारे 20 जवान शहीद हो गए। पूरा देश गुस्से से भर गया था। लेकिन मोदी सरकार ने क्या किया? बयान दिया कि हमारी सीमा में न कोई घुसा है और न कोई घुसा हुआ है।
पाकिस्तान की मदद की चीन ने
इतना ही नहीं, हाल ही में जब पाकिस्तान के साथ झड़प हुई, उस वक्त भी चीन के पाकिस्तान की मदद की। China ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया। उसे अपने हथियार दिए। अपने एक्सपर्ट्स को पाकिस्तान की मदद के लिए भेजा। चीन की हरकतें यहीं नहीं रुकीं। आज भी China लगातार भारत की जमीन हथिया रहा है। अरुणाचल प्रदेश को वो अपना हिस्सा बताता है। वहां सैनिक गांव बसा रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी पर वॉटर बम बना रहा है। यानी जब चाहे पानी रोककर या छोड़कर भारत को नुकसान पहुंचा सकता है। फिर भी मोदी सरकार चीनी कंपनियों को बिजली प्रोजेक्ट्स में आने दे रही है। क्या ये हमारी सुरक्षा का मजाक नहीं है?
भाषण बड़े-बड़े, काम छोटे
मोदी जी चीन का नाम लेकर बहुत भाषण देते हैं। कहते हैं भारत मजबूत हो रहा है। लेकिन असल में ये क्या कर रहे हैं? चीनी कंपनियों को टेंडर दे रहे हैं। बिजली प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियां आने का मतलब है हमारी पावर ग्रिड, सबस्टेशन, ट्रांसमिशन लाइन सब उनके हाथ में सौंप देना। ऐसे में कल को अगर हमारा चीन के साथ कोई तनाव हुआ तो ये कंपनियां क्या करेंगी? क्या ये हमारे नेटवर्क को प्रभावित नहीं कर सकती हैं?
हम पहले ही देख चुके हैं कि चीन कैसे साइबर हमले करता है। कैसे पड़ोसी देशों में अपने बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके दबाव बनाता है। फिर भी मोदी सरकार इन्हें अंदर बुला रही है। जबकि China के साथ हमारे रिश्ते बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। अरुणाचल प्रदेश में चीन लगातार जमीन हड़प रहा है। हमारे आदिवासी चीख चीख कर कह रहे हैं कि उनकी पुश्तैनी जमीन जा रही है। लेकिन मोदी सरकार चुप है। लद्दाख में 2020 के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई। सीमा पर तनाव बना हुआ है। इतना सब होने के बाद भी मोदी सरकार चीन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ये कहां से देश के लिए सही कदम है?
क्या यही आत्मनिर्भरता है?
मोदी जी आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं। लेकिन चीनी कंपनियों को बिजली क्षेत्र में घुसने दे रहे हैं। क्या यही आत्मनिर्भरता है? यहां समझने वाली बात है कि ये सिर्फ बिजली का मुद्दा नहीं है। ये हमारी सुरक्षा, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारी आने वाली पीढ़ी का सवाल है। अगर China हमारे बिजली सिस्टम में घुस गया तो भविष्य में क्या हो सकता है, सोचिए। हमारे सैनिक सीमा पर जान दे रहे हैं। लेकिन यहां सरकार चीनी कंपनियों को न्योता दे रही है। मोदी सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर चीनी कंपनियों को टेंडर क्यों दिए गए। क्या इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों से मंजूरी ली गई?
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